सीजी भास्कर, 4 जनवरी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण दिया। यह मुलाकात छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर अंचल की समृद्ध जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) राज्य की जनजातीय विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार का एक व्यापक प्रयास है, जिसमें पारंपरिक जीवनशैली को गरिमामयी मंच प्रदान किया जाता है।
तीन चरणों में होगा आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा। इसका अंतिम और मुख्य चरण फरवरी 2026 में बस्तर क्षेत्र में आयोजित होगा, जिसमें राज्यभर से जनजातीय कलाकारों की सहभागिता रहेगी (Bastar Pandum 2026)। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी योजनाओं में हो रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
Bastar Pandum 2026 की राष्ट्रपति ने की सराहना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जनजातीय संस्कृति से जुड़े इस महोत्सव की सराहना की और बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता को सशक्त बनाते हैं। उल्लेखनीय है कि बस्तर पंडुम 2026 के माध्यम से लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्ययंत्र, हस्तशिल्प, जनजातीय व्यंजन, पारंपरिक वेशभूषा और अन्य सांस्कृतिक विधाओं का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा ।


