सीजी भास्कर, 10 जनवरी। छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान (Tribal Culture of Chhattisgarh), लोकसंस्कृति (Folk Culture) और परंपराओं का सबसे बड़ा महोत्सव ‘बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026)’ इस वर्ष 10 जनवरी से पूरे उत्साह, गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति (Bastar Tribal Culture), पारंपरिक जीवनशैली (Tribal Lifestyle), लोककला (Tribal Folk Art), खान-पान (Traditional Food), वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है।
‘पंडुम’ शब्द स्वयं उत्सव का प्रतीक है और यही कारण है कि बस्तर पंडुम (Bastar Pandum Festival) बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना (Cultural Identity of Bastar) और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब बनकर सामने आता है। यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही जनजातीय विरासत (Tribal Heritage) के संरक्षण और संवर्धन की एक सशक्त पहल है।
इस वर्ष बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026 Event) का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा—ग्राम पंचायत स्तर (Village Level Cultural Event), विकासखंड एवं जिला स्तर (Block and District Level) तथा संभाग एवं राज्य स्तरीय समापन समारोह (State Level Cultural Festival)। इन चरणों के माध्यम से बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में निवासरत आदिवासी कलाकारों (Tribal Artists), शिल्पकारों (Tribal Craftsmen), लोकगायकों और नृत्य दलों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का व्यापक अवसर मिलेगा।
उत्सव के दौरान माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा सहित विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक लोकनृत्यों (Traditional Tribal Dance) की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। मांदर, ढोल, तिरिया, बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों (Traditional Musical Instruments) की गूंज पूरे वातावरण को उत्सवी रंगों से सराबोर कर देगी।
कार्यक्रम में जनजातीय समाज की विशिष्ट वेशभूषा (Tribal Dress), प्राकृतिक रंगों से सजे परिधान, आकर्षक आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार (Traditional Ornaments) दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। बस्तर पंडुम (Bastar Pandum Festival) युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और परंपराओं को आत्मसात करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उत्सव स्थल पर आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजन (Tribal Food), पेय पदार्थ, मोटे अनाज (Millets of Bastar), कंद-मूल, साग-सब्जी एवं औषधीय खाद्य पदार्थों (Medicinal Foods) की प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इससे न केवल पारंपरिक पोषण ज्ञान (Traditional Nutrition) को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय खाद्य संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी।
विभिन्न स्तरों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों, समूहों और प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र (Cultural Awards) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। यह पहल कलाकारों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ लोककलाओं (Folk Arts Preservation) के संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
बस्तर पंडुम 2026 (Bastar Pandum 2026) के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली (Tribal Life Style), परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) को सशक्त करता है, बल्कि पर्यटन (Bastar Tourism) और स्थानीय अर्थव्यवस्था (Local Economy) को भी नई गति देता है। आज बस्तर पंडुम केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, अस्मिता और गौरव का सशक्त प्रतीक बन चुका है। देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटक और संस्कृति प्रेमी इस उत्सव के माध्यम से बस्तर की आत्मा को बेहद करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं।




