सीजी भास्कर 25 जनवरी BCCI Central Contract Update: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड नए सत्र से सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में जारी होने वाली नई सूची सिर्फ खिलाड़ियों के नामों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उनकी कमाई का पूरा समीकरण भी बदल देगी। इस बदलाव का सीधा असर टीम इंडिया के सीनियर और स्टार खिलाड़ियों पर पड़ने वाला है।
फॉर्मेट कमिटमेंट बनेगा सबसे बड़ा पैमाना
नई व्यवस्था में खिलाड़ियों को मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट का आधार केवल नाम या लोकप्रियता नहीं होगी। बोर्ड फॉर्मेट कमिटमेंट, फिटनेस और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे फैक्टर्स को प्राथमिकता देने जा रहा है। इसी वजह से मौजूदा ए-प्लस कैटेगरी को खत्म किए जाने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि अब बहुत कम खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट में नियमित रूप से खेल रहे हैं।
सिर्फ तीन कैटेगरी में बंटेंगे खिलाड़ी
2025-26 सीजन से सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट को केवल A, B और C कैटेगरी में सीमित रखा जा सकता है। अब तक ए-प्लस ग्रेड में सालाना 7 करोड़ रुपये का रिटेनर मिलता था, लेकिन नए ढांचे में यह ग्रेड इतिहास बन सकता है। बोर्ड का मानना है कि बदलते क्रिकेट कैलेंडर में पुरानी ग्रेडिंग प्रासंगिक नहीं रही।
बुमराह अकेले खिलाड़ी, जिनकी कमाई सुरक्षित
मौजूदा हालात में जसप्रीत बुमराह ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो टेस्ट, वनडे और टी20—तीनों फॉर्मेट में भारत के लिए सक्रिय हैं। इसी कारण रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ए-प्लस ग्रेड हटने के बावजूद बुमराह की सालाना कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्हें अब भी करीब 7 करोड़ रुपये का रिटेनर मिलने की संभावना है, जिससे वह बाकी खिलाड़ियों से अलग खड़े नजर आएंगे।
रोहित-विराट की सैलरी में आ सकती है गिरावट
रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट और टी20 से संन्यास के बाद उनकी उपलब्धता सिर्फ वनडे फॉर्मेट तक सीमित हो गई है। इसी वजह से दोनों खिलाड़ियों को B कैटेगरी में रखा जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो उनकी सालाना सैलरी 5 करोड़ से घटकर 3 करोड़ रुपये तक आ सकती है।
जडेजा भी बदली हुई भूमिका में
रवींद्र जडेजा ने भी टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी बना ली है और अब वह टेस्ट व वनडे तक सीमित हैं। ऐसे में उनका कॉन्ट्रैक्ट ग्रेड भी फॉर्मेट कमिटमेंट के आधार पर तय किया जाएगा। बोर्ड अब एक जैसे पैमाने से सभी खिलाड़ियों का मूल्यांकन करना चाहता है ।
बोर्ड का साफ संदेश
इस नए सिस्टम के जरिए बोर्ड यह संकेत देना चाहता है कि भविष्य में वही खिलाड़ी सबसे ज्यादा कमाएगा, जो टीम के लिए ज्यादा उपलब्ध रहेगा। नाम बड़ा हो या रिकॉर्ड शानदार—अब प्राथमिकता निरंतरता और फिटनेस को दी जाएगी। यह फैसला भारतीय क्रिकेट की बदलती जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है।


