सीजी भास्कर, 22 सितंबर। प्रथम श्रेणी में 157 मैच खेल चुके अनुभवी क्रिकेटर मिथुन मन्हास बीसीसीआई (BCCI President Election) के 37वें अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। यह चौंकाने वाली खबर न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर रही है बल्कि देश के क्रिकेट जगत को भी विश्वास नहीं हो रहा है। किसी को भी इसकी उम्मीद नहीं थी कि इतने दिग्गजों के बीच मन्हास का नाम शीर्ष पद के लिए सामने आएगा।
बीसीसीआई के चुनावों को करीब से देख चुके एक अनुभवी क्रिकेट प्रशासक (BCCI President Election) ने इस फैसले पर दिलचस्प टिप्पणी की। गोपनीयता की शर्त पर उन्होंने कहा कि देखिए भाजपा नेतृत्व ने दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपने मुख्यमंत्री कैसे चुने। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी ने दावा किया होता कि वह जानता है कि रेखा गुप्ता, मोहन यादव और भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बनेंगे तो वह गलत होता। किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी। ठीक वैसे ही बीसीसीआई में विकल्प कम जरूर थे लेकिन मिथुन मन्हास का नाम सबसे बड़ा सरप्राइज है।
अनुभवी प्रशासक ने कहा कि मन्हास जैसे खिलाड़ी के लिए संयुक्त सचिव का पद ज्यादा उपयुक्त होता क्योंकि एक टेस्ट खिलाड़ी (रघुराम भट्ट) को कोषाध्यक्ष बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब चुनावी सूची में तीन टेस्ट खिलाड़ी थे और उनमें से दो (सौरव गांगुली और हरभजन सिंह) सौ से अधिक टेस्ट खेल चुके हैं, तो मन्हास का चयन निश्चित रूप से हैरानी भरा है।
दिल्ली के एक अन्य क्रिकेटर (BCCI President Election) ने मन्हास को “स्ट्रीट स्मार्ट” बताया। उन्होंने कहा कि जब मिथुन दिल्ली क्रिकेट में अपनी जगह बना रहे थे, उन्हें यह भली-भांति पता था कि स्वर्गीय अरुण जेटली दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं। बहुत कम प्रथम श्रेणी क्रिकेटर दक्षिण दिल्ली के पाश इलाके में जेटली के पास रहते थे लेकिन मन्हास ने यह रास्ता चुना।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब विराट कोहली के पिता का रणजी मैच के दौरान निधन हुआ था और टीम मुश्किल में थी, उस समय मिथुन कप्तान थे। उन्होंने विराट से घर जाने को कहा लेकिन विराट के खेलने की जिद पर मन्हास ने सहमति जताई। यह घटना उनके नेतृत्व गुणों को दर्शाती है।
दिल्ली क्रिकेट में उनके दोस्त वीरेंद्र सहवाग और युवराज सिंह जैसे दिग्गज थे। हालांकि टी20 में उनका प्रदर्शन औसत रहा, फिर भी उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स (जब सहवाग कप्तान थे), पुणे वारियर्स और किंग्स इलेवन पंजाब (युवराज की कप्तानी में) के लिए 55 आईपीएल मैच खेले। वीरू और मिथुन एक समय बहुत अच्छे दोस्त रहे।
2016-17 में जब गौतम गंभीर फिर से दिल्ली के कप्तान बने, तो 35 साल से अधिक उम्र के मन्हास जम्मू-कश्मीर लौट गए। वहां उन्होंने कुछ समय क्रिकेट खेला और बाद में राज्य क्रिकेट बोर्ड में सुधार लाने के लिए प्रशासक बने। हालांकि उस भूमिका में उनका प्रदर्शन मिला-जुला रहा।
क्रिकेट जगत में यह चयन बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। दिग्गज खिलाड़ियों जैसे गांगुली, मोरे और हरभजन को पीछे छोड़कर मिथुन का बीसीसीआई अध्यक्ष बनना निश्चित रूप से (Surprise Selection) है। अब देखना होगा कि अनुभवी घरेलू क्रिकेटर से लेकर प्रशासक तक का सफर तय करने वाले मन्हास भारतीय क्रिकेट प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं।





