सीजी भास्कर 31 दिसम्बर। भारत के शासन और रणनीतिक दिशा के लिहाज़ से वर्ष 2025 (Bharat In Action 2025) केवल एक कैलेंडर ईयर नहीं रहा, बल्कि यह उस निर्णायक बदलाव का प्रतीक बन गया जिसने देश की सोच, प्रतिक्रिया और वैश्विक छवि—तीनों को नए सिरे से परिभाषित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह वर्ष अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति—हर मोर्चे पर भारत के आत्मविश्वास की स्पष्ट घोषणा बनकर सामने आया।
ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ और MyGov के पूर्व डायरेक्टर अखिलेश मिश्रा के विश्लेषण के अनुसार, 2025 वह वर्ष रहा जब भारत ने प्रतिक्रियात्मक नीति से आगे बढ़कर सिद्धांत-आधारित राज्य की भूमिका अपनाई।
बाहरी सुरक्षा: डोज़ियर से आगे, निर्णायक नीति की ओर
2014 से पहले आतंकवाद के जवाब में भारत की रणनीति संयम और अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति तक सीमित रहती थी। लेकिन समय के साथ यह स्पष्ट हुआ कि संयम को कमजोरी समझा जा रहा है। बालाकोट एयर स्ट्राइक ने इस सोच को तोड़ा, जबकि 2025 में ऑपरेशन सिंदूर ने इसे स्थायी नीति का रूप दे दिया।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई इस कार्रवाई ने यह संकेत (Bharat In Action 2025) साफ कर दिया कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया नहीं देता, बल्कि खतरे की जड़ों पर प्रहार करता है। यह प्रतिशोध नहीं था, बल्कि एक स्थापित सिद्धांत—कि आतंक और उसे संरक्षण देने वाले अब अलग-अलग नहीं देखे जाएंगे।
न्यू नॉर्मल डॉक्ट्रिन: तीन रेड लाइन
2025 में भारत की सुरक्षा नीति को औपचारिक रूप से नई परिभाषा मिली—
आतंकी हमला अब युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।
न्यूक्लियर ब्लैकमेल भारत की प्रतिक्रिया को सीमित नहीं कर सकता।
आतंकी, उनके हैंडलर और उन्हें संरक्षण देने वाले राष्ट्र—सभी एक ही श्रेणी में हैं।
यह बदलाव भारत को एक पैसिव स्टेट से दंड देने वाले संप्रभु राष्ट्र में बदलने की घोषणा थी।
सिंधु जल संधि: रणनीतिक उदारता पर विराम
1960 की सिंधु जल संधि दशकों तक निभाई गई, तब भी जब सीमापार आतंक जारी रहा। 2025 में यह विरोधाभास समाप्त हुआ। संधि के सस्पेंशन ने यह संदेश दिया कि हिंसा और उदारता एक साथ नहीं चल सकतीं। यह कोई भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि स्पष्ट रणनीतिक रेखा थी।
आंतरिक सुरक्षा: रेड कॉरिडोर का सिमटना
नक्सलवाद को लंबे समय तक सामाजिक समस्या मानकर टालने की नीति 2025 तक पूरी तरह बदली। अब इसे संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह मानकर निर्णायक कार्रवाई की गई। जहाँ कभी 182 जिले नक्सल प्रभावित थे, वहाँ अब यह संख्या घटकर लगभग 11 रह गई है। लक्ष्य स्पष्ट है—मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत।
माओवादी कमांड स्ट्रक्चर का पतन
2025 में माओवादी नेतृत्व की रीढ़ तोड़ दी गई। शीर्ष कमांडरों का निष्क्रिय होना, सैकड़ों कैडर का न्यूट्रलाइजेशन और हजारों का आत्मसमर्पण—यह सब एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम (Bharat In Action 2025) था, जिसमें हथियारबंद और शहरी नेटवर्क—दोनों को एक साथ खत्म किया गया।
रक्षा उत्पादन: निर्भरता से निवारण तक
2014 में जहाँ भारत रक्षा आयात पर निर्भर था, वहीं 2025 तक तस्वीर बदल चुकी है।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचा,
डिफेंस एक्सपोर्ट 23,600 करोड़ रुपये के पार गया।
यह सिर्फ आर्थिक उपलब्धि नहीं, बल्कि रणनीतिक स्वतंत्रता का प्रमाण है।
नागरिकता संशोधन अधिनियम: सभ्यतागत जिम्मेदारी
CAA के प्रभावी क्रियान्वयन और कट-ऑफ डेट के विस्तार ने उन समुदायों को कानूनी पहचान दी, जो वर्षों से प्रताड़ना के बावजूद देशविहीन थे। यह कदम केवल नीति नहीं, बल्कि सभ्यतागत उत्तरदायित्व की स्वीकृति था।





