सीजी भास्कर, 02 सितम्बर। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में छत्तीसगढ़ में उजागर हुए 326 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।
राज्य सरकार ने इस पर तत्काल कदम उठाते हुए कलेक्टरों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (BharatMala Scam Report) को अंतरिम रिपोर्ट के रूप में केंद्र को भेज दिया है। वहीं संभागायुक्तों से कराई जा रही जांच की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इसके उपलब्ध होते ही अंतिम रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने घोटाले पर जानकारी मांगी है और राज्य सरकार इसे गंभीरता से ले रही है।
छत्तीसगढ़ में रायपुर से विशाखापट्टनम तक प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई।
रायपुर के अभनपुर ब्लॉक में एकड़ माप की जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर मुआवजा राशि 35 करोड़ से बढ़ाकर 326 करोड़ कर दी गई।इसमें से 248 करोड़ का भुगतान पहले ही कर दिया गया था और 78 करोड़ का दावा शेष था, तभी यह बड़ा घोटाला (BharatMala Scam Report) उजागर हुआ।
छोटे उरला, बड़े उरला और नायकबांधा गांव की जमीनों में कृत्रिम प्लॉटिंग कर मुआवजा राशि बढ़ाने का खेल किया गया।
ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने इस मामले में तत्काल कार्रवाई की।
एसडीएम निर्भय साहू, तहसीलदार शशिकांत कुर्रे, पटवारी जितेंद्र साहू, बसंती घृतलहरे समेत कई अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर निलंबन की कार्यवाही की गई है।
सभी आरोपित इस समय फरार बताए जा रहे हैं और विशेष न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ वारंट जारी हो चुका है।
इस घोटाले (BharatMala Scam Report) में लाभान्वित हुए हरमीत खनूजा, विजय जैन, उमा तिवारी और केदार तिवारी को अप्रैल महीने में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि जुलाई में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई।
राज्य में यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक स्तर पर भी गहन चर्चा का विषय बन गया है।
केंद्र और राज्य दोनों ही स्तर पर निगरानी तेज हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होगी।




