सीजी भास्कर, 31 मई : भिलाई की स्टील सिटी शनिवार को पूरी तरह से दक्षिण भारतीय आस्था, वैदिक मंत्रोच्चार और सनातन संस्कृति के सतरंगी रंग में सराबोर (Bhilai Balaji Mandir Shobhayatra ) हो गई। अवसर था सेक्टर-05 स्थित सुप्रसिद्ध बालाजी मंदिर की 52वीं वर्षगांठ का, जहां आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) और माता श्रीदेवी-भूदेवी की एक बेहद अलौकिक और भव्य शोभायात्रा निकाली गई। पंडित गोपालाचारी, द्वारिका तिरुमला और विशेष रूप से तिरुमला (तिरुपति) से पधारे अतिथि पंडितों के सान्निध्य में यह पूरा आयोजन संपन्न हुआ।
रंग-बिरंगे फूलों, आकर्षक झालरों, झूमरों और सतरंगी लाइटों से सजे एक विशाल रथ पर शेषनाग आसन पर देवियों संग विराजमान भगवान बालाजी के उत्सव विग्रहों के दर्शन के लिए सड़कों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। समिति के अध्यक्ष पीवी राव और सचिव पीएस राव के नेतृत्व में निकली इस शोभायात्रा ने भिलाई में साक्षात तिरुपति धाम का जीवंत अहसास करा दिया।
दक्षिण भारतीय लोकनृत्य ‘कोलाटम’ ने मोहा मन
ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और गाजे-बाजों की थाप के साथ जब भगवान बालाजी की सवारी मंदिर परिसर से बाहर निकली, तो पूरा माहौल ‘गोविंदा-गोविंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। यह भव्य शोभायात्रा सेंट्रल एवेन्यू रोड, 2.5 मिलियन टन चौक और सेक्टर-04 के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी।
इस दिव्य यात्रा के आकर्षण और सांस्कृतिक वैभव को इन बिंदुओं के जरिए समझा जा सकता है।
सड़कों पर रंगोली और पुष्पवर्षा : भगवान के स्वागत में महिलाओं और युवतियों ने पूरे मार्ग पर पारंपरिक और आधुनिक रंगोलियां सजाई थीं। जगह-जगह पर श्रद्धालुओं ने रथ पर पुष्पवर्षा कर भगवान की महाआरती उतारी।
कोलाटम नृत्य की धूम : आंध्र महिला मंडली की महिलाओं और युवतियों ने गरबा की तर्ज पर दक्षिण भारतीय पारंपरिक लोकनृत्य ‘कोलाटम’ (डंडिया नृत्य) की रास्ते भर इतनी मनोहारी प्रस्तुति दी कि राहगीर भी ठिठक कर देखने को मजबूर हो गए।
भक्ति में डूबा हर वर्ग : भिलाई नादस्वरम ग्रुप के पीवी दयाकर व विनोद कुमार ने नादस्वरम, पीवी स्वामी ने ढोल और पी प्रवलिका ने झांझ पर ऐसी कड़क जुगलबंदी पेश की कि बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी झूम उठे।
एकांत सेवा : देर रात तक नगर भ्रमण करने के बाद यह शोभायात्रा पुनः बालाजी मंदिर लौटी, जहां भगवान को कड़े विधि-विधान के साथ ‘एकांत सेवा’ अर्पित की गई।
शिवनाथ नदी के अभिमंत्रित जल से 108 कलशों का महाअभिषेक
इस पावन धार्मिक महोत्सव की शुरुआत ब्रह्ममुहूर्त में भगवान को जगाने की परंपरा ‘सुप्रभातम’ के पाठ से हुई, जिसमें संपूर्ण चराचर जगत और तीनों लोकों के कल्याण की कामना की गई। इसके बाद पंडित गोपालाचारी के मार्गदर्शन में पंचामृत और विशेष रूप से शिवनाथ नदी से लाए गए पवित्र अभिमंत्रित जल से भगवान का दिव्य अभिषेक कराया गया। इसके बाद ‘अष्टोत्तर शत कलशाभिषेकम’ के तहत भगवान तिरुपति बालाजी को 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया। इस महाअभिषेक के साक्षी बनने और भगवान की विशेष कृपा पाने के लिए हजारों श्रद्धालुओं ने सहस्रनामार्चना अनुष्ठान में कड़ाई से हिस्सा लिया।
जब वर बने भगवान वेंकटेश्वर और वधू बनीं देवियां
दोपहर को मंदिर प्रांगण में सनातन मर्यादाओं और दक्षिण भारतीय विधि-विधान के तहत भगवान बालाजी और माताओं श्रीदेवी-भूदेवी का भव्य कल्याणोत्सव (विवाहोत्सव) कराया गया। इस महा-अनुष्ठान में टीवीएन शंकर और के लक्ष्मीनारायण अपनी पत्नियों सहित मुख्य यजमान के रूप में शामिल हुए।
“वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान बालाजी को दूल्हे (वर) और माता श्रीदेवी-भूदेवी को दुल्हन (वधू) के रूप में अलंकृत किया गया। स्वर्णाभूषणों और नवीन रेशमी वस्त्रों से सजे भगवान के इस दिव्य रूप को देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए। विवाह की रस्मों के दौरान श्रद्धालुओं ने गोदान, वस्त्रदान और कन्यादान की सनातन परंपराएं निभाईं और पंडितों ने प्रतीकात्मक रूप से देवियों को मंगलसूत्र अर्पित किया।”
इस पावन विवाहोत्सव के पूर्ण होने के बाद दोपहर को उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद और विशेष भोग का वितरण किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए पूरी शोभायात्रा के मार्ग में जगह-जगह पर भक्तों के लिए शीतलपेय, शरबत और फलाहार की कड़क व्यवस्था की गई थी। भिलाई के सेक्टर-05 में हुआ यह 52वां वार्षिकोत्सव अपनी भव्यता और आस्था के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।




