Bhilai Loan Fraud : छत्तीसगढ़ के भिलाई में नया घर खरीदने का सपना देख रहे आम नागरिकों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले एक शातिर गिरोह को नेवई पुलिस ने दबोच लिया है। लोन दिलाने का झांसा देकर हजारों रुपये की चपत लगाने और फिर चेक बुक के जरिए ब्लैकमेल करने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पोस्टरों के जरिए बिछाते थे जाल
ठगी की यह कहानी पूर्णिमा साहू (निवासी मौहारी भाठा, नेवई) की शिकायत से शुरू हुई। पूर्णिमा अपना नया घर खरीदने के लिए लोन की तलाश में थीं। आरोपियों ने दीवारों पर चिपकाए गए ‘आसान लोन’ के विज्ञापनों और पोस्टरों के जरिए प्रार्थिया से संपर्क किया। खुद को अधिकृत लोन एजेंट बताकर उन्होंने महिला को अपने विश्वास में लिया और लोन पास कराने के नाम पर जरूरी दस्तावेज ले लिए।
66 हजार की ठगी और ब्लैकमेलिंग का खेल
आरोपियों ने फर्जी तरीके से प्रार्थिया के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाए और उनकी चेक बुक अपने पास रख ली।
- प्रोसेसिंग फीस: लोन दिलाने के नाम पर किश्तों में कुल ₹66,500 ऐंठ लिए।
- धमकी: जब प्रार्थिया ने लोन न मिलने पर अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी असली रंग में आ गए। उन्होंने प्रार्थिया के ही बैंक खातों के चेक का दुरुपयोग करने और उन्हें फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।
पुलिस एक्शन: 3 आरोपी सलाखों के पीछे
परेशान होकर पीड़िता ने नेवई थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता देखते हुए एसीसीयू (ACCU) भिलाई और नेवई पुलिस की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया:
- भूपेश भारती उर्फ राम (27 वर्ष), निवासी ग्राम छाटा, उतई।
- संजय जनबंधु (35 वर्ष), निवासी शारदापारा कैंप-2, भिलाई।
- हेमंत गुप्ता उर्फ किशन (28 वर्ष), निवासी रूआबांधा बस्ती, भिलाई।
पुलिस ने इनके पास से ठगी से जुड़े दस्तावेज और प्रार्थिया के बैंक चेक भी बरामद किए हैं।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए जेल
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। 10 अप्रैल को सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य कड़ियों और अन्य शिकार हुए लोगों की तलाश कर रही है।


