Bhopal Pathology Scam : भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आउटसोर्स की गई पैथोलॉजी सेवाओं को लेकर अब एक बड़ा घोटाला सुर्खियों में है। आरोप यह कि दो निजी कंपनियों ने कई केंद्रों पर मशीनें बंद रहने के बावजूद मरीजों की रिपोर्ट तैयार की, और इसके आधार पर सरकारी खजाने से भारी रकम वसूली। शिकायत करने वाले जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर किया गया संगठित छल है।
2019 से अब तक जांचों का भारी आंकड़ा, भुगतान ने चौंकाया
विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार वर्ष 2019 से अब तक कंपनियों ने 12 करोड़ 84 लाख से अधिक पैथोलॉजी जांचें दर्ज दिखाई हैं। इन कथित जांचों के आधार पर सरकार ने साइंस हाउस प्रा. लि. और पीओसीटी साइंस हाउस प्रा. लि. को कुल 943 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। आंकड़ों की यह मात्रा सामान्य सेवा क्षमता से कहीं अधिक मानी जा रही है, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
85 अस्पतालों में सेवा, लेकिन रिकॉर्ड पर उठ रहे सवाल
इन कंपनियों को जिला अस्पताल और 35 सिविल अस्पताल समेत कुल 85 सरकारी संस्थानों में पैथोलॉजी जांच का काम सौंपा गया था। इसके बावजूद, कई स्थानों से यह शिकायत सामने आई कि मरीजों को टेस्ट के लिए दूसरे केंद्रों पर भेजना पड़ता था, क्योंकि मशीनें लंबे समय तक बंद रहीं। इसके विपरीत, भुगतान रिकॉर्ड में वही अवधि अत्यधिक जांचों के रूप में दर्ज है।
पुराने केस पेंडिंग, फिर भी सेवाएँ बढ़ाई गईं
आरोप यह भी है कि संबंधित कंपनियों के संचालकों के खिलाफ पहले से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में मामला दर्ज है और उनके प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई भी हो चुकी है। इसके बावजूद, इसी वर्ष जुलाई में कंपनी की सेवाओं का विस्तार एक साल के लिए बढ़ा दिया गया। यह निर्णय स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
स्कूलों की अव्यवस्था पर भी विपक्ष का प्रहार
पैथोलॉजी विवाद के साथ ही विपक्ष ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर भी गंभीर टिप्पणियाँ कीं। बताया गया कि रायसेन के कई स्कूलों में छोटे बच्चों से झाड़ू लगवाया जा रहा है, शिक्षक नियमित उपस्थित नहीं रहते, और सप्ताह में मुश्किल से तीन–चार दिन कक्षाएँ संचालित होती हैं। इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच चुकी है।
छात्रवृत्ति में गड़बड़ी, पैसे अन्य खातों में गए
गुना जिले के फतेहगढ़ संदीपनी विद्यालय में 34 छात्रों के नाम पर फर्जी खाते खोलकर छात्रवृत्ति की राशि अन्य राज्यों में स्थित खातों में ट्रांसफर करने का मामला भी सामने आया। शिवपुरी की 12वीं की छात्रा मुस्कान कुशवाह का उदाहरण देते हुए कहा गया कि उसकी छात्रवृत्ति की राशि बिहार में स्थानांतरित कर दी गई। इस मुद्दे पर छात्र संगठनों ने अधिकारों की सुरक्षा के लिए आंदोलन की घोषणा कर दी है।





