सीजी भास्कर, 14 मई : छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में मैकल पर्वत श्रृंखला की खूबसूरत वादियों में स्थित प्राचीन भोरमदेव मंदिर (Bhoramdeo Temple Kawardha) अपनी बेजोड़ शिल्पकला और अद्वितीय इतिहास के कारण प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का गौरव है। लगभग 1000 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक शिव मंदिर को इसकी विलक्षण नक्काशी और सौंदर्य के कारण “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहा जाता है। यह मंदिर सदियों से इतिहासकारों, कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
नागर शैली का बेजोड़ नमूना और ऐतिहासिक भव्यता
इस प्राचीन भव्य मंदिर (Bhoramdeo Temple Kawardha) का निर्माण 7वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य फणि नागवंशी राजाओं द्वारा कराया गया था। वास्तुकला की दृष्टि से यह मंदिर नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे मुख्य रूप से तीन भागों गर्भगृह, अंतराल और मंडप में विभाजित किया गया है। पत्थरों को अत्यंत कलात्मक ढंग से तराशकर बनाई गई मंदिर की बाहरी दीवारें तत्कालीन लोक जीवन का आइना हैं। इन दीवारों पर देवी-देवताओं, नृत्यरत अप्सराओं, गंधर्वों, नर्तकियों और विभिन्न सांस्कृतिक प्रतीकों की सूक्ष्म और जीवंत नक्काशी की गई है। मूर्तियों में भाव-भंगिमाओं की स्वाभाविकता और सौंदर्य देखते ही बनता है।
खजुराहो और कोणार्क की झलक Bhoramdeo Temple Kawardha
भोरमदेव (Bhoramdeo Temple Kawardha) की शिल्पकला में मध्य प्रदेश के खजुराहो और ओडिशा के कोणार्क मंदिर की स्पष्ट स्थापत्य कला की झलक मिलती है। इसके बावजूद, स्थानीय जनजातीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ी लोक जीवन का गहरा प्रभाव इसे दुनिया के अन्य मंदिरों से अलग और विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। मंदिर की दीवारें तत्कालीन समाज के संगीत, नृत्य और वेशभूषा को जीवंत रूप में प्रदर्शित करती हैं, जिसके कारण यह पुरातत्वविदों और शोधकर्ताओं के लिए अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके समीप स्थित मड़वा महल और छेरका महल भी नागवंशी राजाओं के इतिहास की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं।
146 करोड़ से संवरेगा भोरमदेव कॉरिडोर
केंद्र सरकार की ‘स्वदेश दर्शन योजना 2.0’ के तहत भोरमदेव मंदिर (Bhoramdeo Temple Kawardha) को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर यहाँ 146 करोड़ रुपये की लागत से ‘भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना’ की शुरुआत की जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विकास करना है। इसके अंतर्गत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, भव्य पार्किंग, सुविधायुक्त विश्राम स्थल, अत्याधुनिक प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए विशेष बाजार विकसित किए जाएंगे। इस कॉरिडोर के निर्माण से न केवल पर्यटन को पंख लगेंगे, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार और रोजगार के बड़े अवसर भी पैदा होंगे।
सड़क, रेल और हवाई मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी
भोरमदेव मंदिर कवर्धा जिला मुख्यालय से मात्र 18 किलोमीटर और राजधानी रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग से यहाँ के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध है। रेल मार्ग के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन रायपुर और राजनांदगांव हैं, जबकि हवाई मार्ग के लिए रायपुर का स्वामी विवेकानंद विमानतल सबसे पास है। पर्यटकों के ठहरने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का बैगा एथनिक रिसॉर्ट (सरोधा दादर) एक शानदार विकल्प है, इसके अलावा कवर्धा शहर में भी कई निजी होटल और शासकीय विश्राम गृह उपलब्ध हैं।



