सीजी भास्कर, 29 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी योजना भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर (Bhoramdev Tourism Corridor) का भूमिपूजन आगामी 1 जनवरी को होने जा रहा है। लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का भूमिपूजन केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के करकमलों से संपन्न होगा। यह परियोजना राज्य के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
भूमिपूजन कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भोरमदेव मंदिर परिसर स्थित आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आयोजन से जुड़ी सभी तैयारियों की विस्तार से जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री ने मंच व्यवस्था, अतिथियों की बैठक, आम जनसमुदाय के बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात, पार्किंग, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं को समय पर पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत प्रतिनिधि, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आयोजन में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और श्रद्धालुओं तथा आम नागरिकों को सुगम एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन को विशेष रूप से यातायात प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
भोरमदेव मंदिर परिसर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक आस्था के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर (Bhoramdev Tourism Corridor) के निर्माण से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। परियोजना के अंतर्गत सड़क विकास, पार्किंग व्यवस्था, व्यू प्वाइंट, पर्यटक सुविधा केंद्र, सौंदर्यीकरण कार्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
इस पर्यटन कॉरिडोर से क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक अधोसंरचना से जोड़ा जाए, ताकि राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को व्यापक पहचान मिल सके।
नए वर्ष के पहले दिन होने वाला भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर का भूमिपूजन छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर एक नई उपलब्धि के रूप में दर्ज होगा और आने वाले वर्षों में यह परियोजना राज्य के पर्यटन विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।


