सीजी भास्कर 2 दिसम्बर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी को लेकर माहौल गरमा गया है। Bhupesh Baghel Remark Row उस वक्त चर्चा में आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से डिप्टी सीएम अरुण साव को लेकर की गई टिप्पणी पर सत्तापक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया। बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
यह विवाद तीन दिन पहले बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में हुई एक जनसभा से जुड़ा है। यहां संबोधन के दौरान भूपेश बघेल ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
उन्होंने विकास कार्यों का जिक्र करते हुए सड़क निर्माण के आंकड़े गिनाए और तुलना करते हुए ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर अब विरोध तेज हो गया है।
Bhupesh Baghel Remark Row पर मंत्री टंकराम वर्मा का पलटवार
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा होनी चाहिए। Bhupesh Baghel Remark Row पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने साफ कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जैसे पद पर रहे व्यक्ति से ऐसी शब्दावली की अपेक्षा नहीं की जाती। उनके मुताबिक, चुनावी हार के बाद कांग्रेस भीतर ही भीतर असंतुलन से जूझ रही है।
राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच मंत्री टंकराम वर्मा ने आगामी बजट को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि 7 जनवरी को विभागीय बैठकों का दौर शुरू होगा।
इन बैठकों में अधोसंरचना, शिक्षकों की कमी, प्राध्यापकों के रिक्त पद और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया जाएगा, ताकि बजट में ठोस प्रावधान किए जा सकें।
Bhupesh Baghel Remark Row में कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति पर टिप्पणी
कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी के गठन को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री वर्मा ने कहा कि पार्टी इस समय अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है। Bhupesh Baghel Remark Row को इसी अस्थिरता से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस फिलहाल अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।
तमनार क्षेत्र में खदान विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक से जुड़ी घटना पर भी मंत्री ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन में कानून हाथ में लेना गलत है। ऐसी घटनाएं निंदनीय हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना ही लोकतांत्रिक तरीका है।
सियासत में भाषा बनाम मुद्दों की बहस
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक विमर्श में भाषा की सीमा क्या होनी चाहिए। Bhupesh Baghel Remark Row अब सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ती तल्खी का प्रतीक बनता दिख रहा है।


