सीजी भास्कर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ में एनआरएलएम यानी ‘बिहान’ योजना से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं ने मानदेय, नियमितीकरण और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन तेज (Bihan Cadre Protest) कर दिया है।
सोमवार को बड़ी संख्या में सीआरपी और सक्रिय महिला संघ से जुड़ी महिलाओं ने शासन के नाम ज्ञापन सौंपते हुए प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरना प्रदर्शन का ऐलान किया। महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से वे गांव-गांव में योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम कर रही हैं, लेकिन उनकी खुद की आर्थिक और सेवा संबंधी स्थिति बेहद खराब बनी हुई है।
महिला कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में साफ कहा है कि उन्हें वर्तमान में केवल 1910 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिससे आज के दौर में घर चलाना लगभग नामुमकिन है। उनका कहना है कि इतने कम मानदेय में परिवार, बच्चों की पढ़ाई, आना-जाना और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना संभव नहीं है।
इसी कारण उन्होंने छत्तीसगढ़ न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय तय करने की मांग उठाई है। महिलाओं का तर्क है कि जब उनसे नियमित जिम्मेदारियां ली जा रही हैं, तो उन्हें उसी अनुपात में भुगतान भी मिलना चाहिए।
आंदोलन कर रही महिलाओं ने यह भी कहा कि उनका अधिकतर काम अब मोबाइल और ऐप आधारित हो गया है। फील्ड में डेटा अपडेट करना, रिपोर्टिंग करना और ऑनलाइन प्रक्रियाएं पूरी करना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है,
लेकिन इसके लिए न तो उन्हें सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया (Bihan Cadre Protest) जाता है और न ही इंटरनेट या रिचार्ज का कोई भत्ता दिया जाता है। उनका कहना है कि वे अपनी जेब से खर्च कर सरकारी काम कर रही हैं, जो अब बोझ बन चुका है। इसके साथ ही क्लस्टर और जनपद स्तर की बैठकों में आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता नहीं मिलने की शिकायत भी महिलाओं ने उठाई है।
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांगों में नियमितीकरण और औपचारिक नियुक्ति पत्र का मुद्दा भी शामिल है। लंबे समय से काम कर रहीं इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, नियमित किया जाए और उनकी सेवा स्थिति को स्पष्ट करने के लिए नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई ब्लॉकों में मानदेय समय पर नहीं मिलता और 5 से 6 महीने तक भुगतान लटका रहता है। ऐसे में उन्होंने हर महीने सीधे बैंक खाते में समय पर राशि ट्रांसफर करने की मांग की है।
आंदोलन के दौरान महिलाओं ने शासन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार “लखपति दीदी” जैसे अभियानों का प्रचार तो बड़े स्तर पर करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाली वही महिलाएं खुद बुनियादी मानदेय और सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने नाराजगी जताई कि जो कैडर गांवों में महिला समूहों को सक्रिय कर रहा है, स्वरोजगार और सशक्तिकरण के मॉडल खड़े कर रहा है, उसी की समस्याओं पर ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।
सक्रिय महिला संघ की अध्यक्ष पद्मा पाटिल और महासचिव बिंदु यादव ने कहा कि जनवरी से लगातार प्रदर्शन, ज्ञापन और मुलाकातों के बाद भी सिर्फ आश्वासन (Bihan Cadre Protest) ही मिला है। उनके मुताबिक, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाकात के बावजूद स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं आया। यही वजह है कि अब महिलाओं ने आर-पार की लड़ाई का रास्ता चुना है और प्रदेशभर में काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक मांगों पर स्पष्ट और ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
महिलाओं का यह ज्ञापन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और संबंधित जिला प्रशासन को भेजा गया है। अब यह मामला केवल मानदेय बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण महिला कार्यकर्ताओं की भूमिका, सम्मान और सेवा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है, इस पर प्रदेश की हजारों महिला कार्यकर्ताओं की नजर टिकी रहेगी।





