बिहार सरकार ने उद्योग स्थापना को नई गति देने के लिए एक खास पहल शुरू की है, जिसमें योग्य निवेशकों को केवल 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। (Bihar Industrial Land Scheme)
इस कदम का उद्देश्य है—राज्य में बड़े उद्योग बसें, युवाओं के लिए रोजगार बढ़े और आर्थिक ढांचा मजबूत हो।
किन निवेशकों को मिलेगी 1 रुपये वाली जमीन?
यह सुविधा हर किसी के लिए नहीं है। सरकार ने कुछ निश्चित मानदंड तय किए हैं, ताकि वही निवेशक लाभ उठा सकें जिनकी परियोजनाओं से राज्य में बड़ा आर्थिक योगदान हो।
- 100 करोड़ रुपये के निवेश और कम से कम 1,000 लोगों को रोजगार देने वाली कंपनियों को 10 एकड़ जमीन 1 रुपये में दी जाएगी।
- 1,000 करोड़ का निवेश करने वालों को 25 एकड़ तक जमीन मिलेगी।
- वहीं बड़े वैश्विक स्तर की कंपनियों के लिए शर्तें और नरम की गई हैं—यदि कोई कंपनी 200 करोड़ का निवेश प्रस्ताव लाती है, तो उसे भी 10 एकड़ जमीन उपलब्ध होगी।
इन सभी के अतिरिक्त, अन्य श्रेणी के निवेशकों के लिए भी जमीन पर 50% तक की छूट का प्रावधान रखा गया है। (Industrial Land Offer)
Bihar Industrial Land Scheme: योजना में शामिल वित्तीय लाभ
जमीन के अलावा सरकार ने निवेशकों के लिए कई वित्तीय सहायता प्रावधान भी जोड़ दिए हैं, ताकि नई परियोजनाएँ आर्थिक दबाव के बिना आगे बढ़ सकें।
- अधिकतम 40 करोड़ रुपये तक ब्याज सब्सिडी
- 100% SGST की वापसी का विकल्प
- या प्रोजेक्ट लागत के 300% तक नेट SGST रीइंबर्समेंट, जिसकी अवधि 14 साल तक बढ़ सकती है
- साथ में 30% कैपिटल सब्सिडी का प्रावधान
निवेशक अपनी परियोजना की जरूरत के अनुसार इनमें से कोई एक लाभ चुन सकेंगे। (Investment Support Bihar)
आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
पूरी आवेदन प्रणाली डिजिटल रखी गई है। इससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहे और निवेशकों को बिना किसी देरी के मंजूरी मिल सके।
आवेदन के लिए—
- पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड
- और तय फॉर्मेट में आवेदन जमा करना होगा
वेबसाइट पर ‘लैंड बैंक’ वाले सेक्शन में अलग-अलग जिलों में उपलब्ध जमीनों का पूरा ब्योरा देखा जा सकता है, साथ ही तैयार इंडस्ट्रियल शेड्स की जानकारी भी मिलती है।
निवेशकों के लिए बड़ा अवसर
जो कंपनियाँ बड़े पैमाने पर उत्पादन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स या फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश करना चाहती हैं, उनके लिए यह पैकेज बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
कम लागत में जमीन, कम टैक्स दबाव और लंबी अवधि की सब्सिडी—यह तीनों चीजें मिलकर बिहार को आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ते औद्योगिक केंद्रों में शामिल कर सकती हैं।





