सीजी भास्कर, 31 मई : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कड़ी ट्रैप कार्रवाई (Bilaspur ACB Trap Case) के बाद अब शिक्षा विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा और आक्रामक प्रशासनिक कदम उठाया है। कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 के कर्मचारी को घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
आरोपी बाबू को एसीबी की टीम ने 40,000 रुपये की मोटी घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोचा था। इस अमानवीय विफलता और भ्रष्टाचार के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को सस्पेंशन का परचा थमा दिया है और निलंबन अवधि के लिए उसका मुख्यालय कटघोरा निर्धारित किया है। इस बड़ी कार्रवाई से रिश्वतखोरों के पूरे ढर्रे में हड़कंप मच गया है।
ले रहा था 40 हजार की घूस
कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) बिलासपुर से मिली कड़ाई से छानबीन की रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 के अंतर्गत की गई है। इस कड़े जालसाजी के मामले में आरोपी बाबू प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, ने प्रार्थी अमृत बघेल से एक काम के एवज में रिश्वत की मांग की थी।
जैसे ही आरोपी ने 40,000 रुपये थामे, पहले से जाल बिछाकर बैठी एसीबी की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद कड़े कानूनी ढर्रे के तहत आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे सीधे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। जेल की हवा खाने के साथ ही आरोपी बाबू के खिलाफ अब विभाग ने भी समानांतर रूप से कड़क जांच तेज कर दी है ताकि उसके पिछले काले कारनामों की सच्चाई भी सामने आ सके।
जिला शिक्षा अधिकारी का हंटर
इस शर्मनाक मामले को कड़ाई से संज्ञान में लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने माना कि आरोपी प्रदीप मिश्रा का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के पवित्र प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत और घोर अनुशासनहीनता है। विभाग ने कड़े और स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि भ्रष्टाचार और अमानवीय कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नियमों के तहत सबसे सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिससे अन्य भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं को कड़ा सबक मिल सके।
बिना अनुमति नहीं छोड़ सकेगा क्षेत्र
निलंबन आदेश के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी प्रदीप मिश्रा का मुख्यालय अब कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा तय किया गया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उसे नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही नसीब होगा। अब सबसे बड़ा सस्पेंस और चुनौती यह है कि क्या इस कड़े एक्शन के बाद भी बीईओ दफ्तरों में आम जनता और प्रार्थी को परेशान करने का यह घूसखोरी का ढर्रा पूरी तरह बंद होगा? फिलहाल, आदेश के तहत वह बिना सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के अपना नया मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। विभागीय और कानूनी जांच का शिकंजा अब आरोपी बाबू पर चौतरफा कस चुका है।




