शहर की गश्त हो या फील्ड ऑपरेशन, पुलिस का भरोसा वायरलेस संचार पर टिका है। लेकिन (Bilaspur Police Walkie Talkie) नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहे कई सेट अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। पुरानी तकनीक के चलते संदेश कई बार अधूरे पहुंचते हैं, आवाज़ में खड़खड़ाहट रहती है और फौरन रिस्पॉन्स में देरी हो जाती है।
तकनीक बदली, सिस्टम पीछे छूटा
कुछ इलाकों में आधुनिक सेट पहुंच चुके हैं, मगर शहरी थानों में अब भी एनालॉग सिस्टम की पकड़ बनी हुई है। (Analog vs Digital Radio) की तुलना में पुराने उपकरण केवल आवाज़ तक सीमित हैं, जबकि नए डिजिटल सेट में डेटा, लोकेशन और सुरक्षित संचार जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यही तकनीकी अंतर फील्ड पर काम कर रहे जवानों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है।
डार्क स्पॉट्स बनी चुनौती
कई जगहों पर सिग्नल कमजोर पड़ जाता है। इन “डार्क स्पॉट्स” में वायरलेस सेट अचानक चुप हो जाते हैं, जिससे समन्वय टूटता है। बेहतर रिसेप्शन के लिए अतिरिक्त एंटीना लगाए जा रहे हैं, फिर भी (Police Communication Network) का कवरेज एकसमान नहीं बन पा रहा।
मरम्मत से चल रहा काम
तकनीकी टीम पुराने उपकरणों को बार-बार दुरुस्त कर किसी तरह सिस्टम को चालू रखे हुए है। यह तात्कालिक समाधान है, स्थायी नहीं। (Wireless Upgrade Plan) के तहत बड़े पैमाने पर नए सेट लाने की प्रक्रिया शुरू तो हुई है, लेकिन ग्राउंड पर बदलाव धीरे-धीरे दिख रहा है।
आधुनिकीकरण से बढ़ेगी सुरक्षा
सुरक्षित और साफ़ संचार पुलिसिंग की रीढ़ है। आधुनिक डिजिटल सिस्टम लागू होने से ऑपरेशन के दौरान भ्रम कम होगा, रिस्पॉन्स टाइम घटेगा और फील्ड टीमों की सुरक्षा मजबूत होगी। (Bilaspur Police Walkie Talkie) नेटवर्क का अपग्रेड सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी में सीधा निवेश है।




