सीजी भास्कर, 13 दिसंबर | Bilaspur Voter List Controversy: बिलासपुर में मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल अब औपचारिक शिकायत में बदल गए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। नेताओं का कहना है कि सूची में हुए बदलाव सामान्य तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि गंभीर प्रक्रिया-चूक की ओर इशारा करते हैं.
पूर्व जिलाध्यक्ष का नाम, शहर बदला—विवाद की जड़
कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी का नाम बिलासपुर की मतदाता सूची से हटाकर भिलाई नगर के वार्ड क्रमांक 54 में जोड़ दिया गया। पार्टी नेताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि बिना वैध प्रक्रिया के एक जिले से दूसरे जिले में नाम जोड़ना संदेह पैदा करता है.
‘फर्जी मैपिंग’ का दावा, प्रक्रिया पर सवाल
शिकायत में कहा गया कि विजय केशरवानी का निवास, शिक्षा और मतदान का रिकॉर्ड बिलासपुर से जुड़ा रहा है। इसके बावजूद एसआईआर फॉर्म प्रक्रिया के दौरान 2003 की मतदाता सूची में उनका नाम गायब दिखा और भिलाई की सूची में मौजूद मिला। कांग्रेस ने इसे फर्जी मैपिंग करार देते हुए कहा कि पुराने स्थान की मैपिंग रद्द किए बिना नई प्रविष्टि नियमों के विरुद्ध है.
चुनिंदा फेरबदल? प्रतिनिधिमंडल के सवाल
कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि कहीं यह प्रक्रिया चुनिंदा मतदाताओं को प्रभावित करने का तरीका तो नहीं। उन्होंने कहा कि मोहल्लों में एसआईआर के दौरान सामने आई अन्य गड़बड़ियां भी इसी ओर इशारा करती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने पूरे जिले में सूची संशोधन की समग्र समीक्षा की मांग रखी.
कलेक्टर का आश्वासन—जांच होगी, रिपोर्ट जाएगी
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त और एडीएम की मौजूदगी में जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जानकारी संबंधित स्तर पर भेजी जाएगी और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी—.
राजनीतिक हलचल के बीच पारदर्शिता की मांग
प्रतिनिधिमंडल में जिला व शहर कांग्रेस के पदाधिकारी, पूर्व अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, प्रवक्ता, ब्लॉक अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य और पार्षद शामिल रहे। नेताओं ने जोर दिया कि मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है; इसमें किसी भी तरह की चूक विश्वास को कमजोर करती है.





