सीजी भास्कर, 20 जनवरी | छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स की भर्ती को लेकर लंबे समय से चल रहा असंतोष मंगलवार को खुलकर सामने आ गया। CAF Recruitment Protest के तहत 2018 की भर्ती प्रक्रिया में चयन के बाद भी नियुक्ति से वंचित कैंडिडेट्स गृहमंत्री के निवास के बाहर डट गए। नौकरी की मांग को लेकर पहुंचे अभ्यर्थियों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोंक-झोंक की स्थिति बन गई।
वेटिंग लिस्ट में नाम, लेकिन नियुक्ति अब भी दूर
CAF में वर्ष 2018 में कुल 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसमें करीब 417 अभ्यर्थी वेटिंग लिस्ट में शामिल रहे। हैरानी की बात यह है कि बीते सात वर्षों में भी इन कैंडिडेट्स को नियुक्ति नहीं मिल सकी, जबकि विभाग में तीन हजार से अधिक पद आज भी खाली बताए जा रहे हैं। (CAF Recruitment Protest) ने इसी विरोधाभास को सवालों के घेरे में ला दिया है।
किसी ने बदला करियर, कोई अब भी उम्मीद थामे
लंबे इंतज़ार ने कई युवाओं को मजबूर कर दिया कि वे दूसरा करियर विकल्प तलाशें, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी कैंडिडेट्स हैं जो अब तक उम्मीद छोड़ने को तैयार नहीं। कई अभ्यर्थी पिछले सात साल से दफ्तरों, अफसरों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते रहे हैं, फिर भी समाधान नहीं निकला।
परिवार-बच्चों के साथ धरने पर बैठे अभ्यर्थी
पिछले एक महीने से कैंडिडेट्स अपने परिवार और बच्चों के साथ तूता धरना स्थल पर बैठे हुए हैं। मंगलवार को चौथी बार वे अपनी मांग लेकर गृहमंत्री सदन पहुंचे। यहां पुलिस द्वारा रोके जाने पर माहौल गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई। (CAF Recruitment Protest) ने प्रशासन की तैयारियों की भी परीक्षा ले ली।
HM से मुलाकात की मांग पर अड़े कैंडिडेट्स
अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक गृहमंत्री से सीधी बातचीत नहीं होगी, वे वहां से नहीं हटेंगे। उनका दावा है कि पूर्व में दो बार आश्वासन मिला था, लेकिन तीसरी मुलाकात तय नहीं हो सकी। इसी असमंजस ने आंदोलन को और उग्र बना दिया है।
महिलाओं और बच्चों पर बल प्रयोग का आरोप
प्रदर्शन कर रहे कैंडिडेट्स ने आरोप लगाया है कि हटाने के दौरान पुलिस ने महिलाओं और बच्चों पर भी जोर-आजमाइश की। इसी मुद्दे को लेकर विवाद और बढ़ गया है। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि वे शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सुना नहीं जा रहा।
समाधान तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कैंडिडेट्स का स्पष्ट संदेश है कि जब तक नियुक्ति को लेकर ठोस निर्णय या लिखित आश्वासन नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल गृहमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




