CG Contract Appointment के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने एक अहम प्रशासनिक फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त पुलिस उप महानिरीक्षक कमलोचन कश्यप को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उन्हें पुलिस मुख्यालय, रायपुर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (OSD) के पद पर संविदा नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावशील मानी जाएगी।
एक साल या अगले आदेश तक
सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि CG Contract Appointment के अंतर्गत यह पद असंवर्गीय एवं रिक्त श्रेणी में आता है। नियुक्ति की अवधि एक वर्ष अथवा आगामी आदेश जारी होने तक—जो भी पहले हो—निर्धारित की गई है। संविदा सेवा की शर्तें अलग से जारी की जाएंगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया को पारदर्शी रखा गया है।
किन-किन अधिकारियों को भेजी गई सूचना
इस CG Contract Appointment से संबंधित आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री सचिवालय, वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, पुलिस महानिदेशक कार्यालय सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक इकाइयों को भेजी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि नियुक्ति को शासन स्तर पर समन्वय के साथ लागू किया जा रहा है।
क्यों चुने गए कमलोचन कश्यप
कमलोचन कश्यप का चयन CG Contract Appointment के लिए उनके लंबे और चुनौतीपूर्ण पुलिस अनुभव को देखते हुए किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी रणनीतिक समझ और फील्ड-आधारित कार्यशैली को पुलिस महकमे में विशेष सम्मान प्राप्त है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, उनके अनुभव का उपयोग नीति और संचालन के स्तर पर किया जाएगा।
बस्तर से पुलिस मुख्यालय तक
(Professional Policing Experience)
1 जनवरी 1966 को बस्तर जिले के कोठियागुड़ा गांव में जन्मे कमलोचन कश्यप मुरिया आदिवासी समाज से आते हैं। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू कर उन्होंने जगदलपुर से स्नातक और रायपुर से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। यह सफर CG Contract Appointment को सामाजिक प्रतिनिधित्व का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनाता है।
1994 से पुलिस विभाग में योगदान
वर्ष 1994 में उप पुलिस अधीक्षक के रूप में सेवा शुरू करने वाले कश्यप ने खरगोन, उज्जैन, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे जिलों में SDOP और CSP के रूप में काम किया। छत्तीसगढ़ गठन के बाद उनका कैडर यहीं रहा, जहां उन्होंने संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
जंगलों से रणनीति तक
दंतेवाड़ा, बीजापुर और गरियाबंद जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने कई बड़े अभियानों का नेतृत्व किया। जंगलों में जवानों के साथ रहकर की गई कार्रवाई ने उन्हें एक शांत, अनुशासित और रणनीतिक अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई—यही अनुभव अब CG Contract Appointment के माध्यम से पुलिस मुख्यालय को मिलेगा।
अनुभव को फिर से सिस्टम में लाना
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह CG Contract Appointment केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि शासन की उस नीति का संकेत है जिसमें अनुभवी अधिकारियों के ज्ञान को सेवानिवृत्ति के बाद भी उपयोग में लाया जाता है। आने वाले समय में OSD के रूप में उनकी भूमिका नीतिगत और संचालन स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




