सीजी भास्कर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12वीं हिंदी परीक्षा को लेकर उठे कथित पेपर लीक के आरोपों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े (CGBSE Hindi Paper Leak) कर दिए हैं। परीक्षा से ठीक पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुपों में प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते सवाल वायरल होने की चर्चा ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेचैनी बढ़ा दी। मामला तूल पकड़ते ही माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पुलिस और साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कराई है, जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
वायरल दावों ने परीक्षा की साख पर उठाए सवाल
जानकारी के मुताबिक 14 मार्च को आयोजित हिंदी विषय की बोर्ड परीक्षा से पहले, 13 मार्च की रात कुछ प्रश्न सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगे। दावा किया गया कि ये वही सवाल हैं जो अगली सुबह होने वाली परीक्षा में पूछे जाने वाले हैं। इसके बाद छात्रों के बीच असमंजस का माहौल बन गया। कई अभिभावकों ने भी परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता को लेकर चिंता जताई। बोर्ड परीक्षाओं में निष्पक्षता सबसे बड़ी शर्त मानी जाती है, ऐसे में वायरल सामग्री ने पूरे घटनाक्रम को संवेदनशील बना दिया।
मंडल ने दर्ज कराई FIR, साइबर एंगल से जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। अब जांच इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री असली प्रश्नपत्र से मेल खाती थी या फिर परीक्षा से पहले भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि वायरल सामग्री सबसे पहले कहां से प्रसारित हुई, किसने उसे आगे बढ़ाया और क्या इसमें संगठित स्तर पर कोई भूमिका रही।
छात्र संगठन ने घेराव कर उठाए सवाल
मामले के सामने आते ही छात्र राजनीति भी सक्रिय (CGBSE Hindi Paper Leak) हो गई। इस मुद्दे को लेकर छात्र संगठन ने बोर्ड कार्यालय के बाहर विरोध जताया और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि अगर परीक्षा से पहले प्रश्न बाहर पहुंचे हैं तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। विरोध के बाद यह मुद्दा सिर्फ परीक्षा केंद्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया।
सियासत भी गरमाई, सरकार पर विपक्ष का हमला
पेपर लीक के कथित आरोपों को लेकर विपक्ष ने सरकार को सीधे निशाने पर लिया है। आरोप लगाया गया कि परीक्षा प्रणाली को बेहद सख्त और पारदर्शी बनाने के दावे जमीन पर कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। सवाल यह उठाया जा रहा है कि अगर बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील आयोजन में भी गोपनीयता पर संदेह पैदा हो जाए, तो छात्रों का भरोसा कैसे कायम रहेगा। इसी बहाने शासन की परीक्षा प्रबंधन क्षमता पर भी उंगली उठाई जा रही है।
असल चुनौती अब भरोसा बहाल करने की
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात सिर्फ यह नहीं कि वायरल सवाल (CGBSE Hindi Paper Leak) असली थे या नहीं, बल्कि यह भी है कि परीक्षा से पहले ऐसी सामग्री के प्रसार ने भरोसे को चोट पहुंचाई है। छात्र जब परीक्षा हॉल में बैठते हैं, तो उनके मन में सिर्फ तैयारी का दबाव होना चाहिए, सिस्टम पर शक नहीं। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि कथित लीक की पुष्टि होती है तो कार्रवाई और जवाबदेही का सवाल और तीखा होगा, और अगर दावा गलत निकलता है तो अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी होगी। फिलहाल, यह विवाद साफ बता रहा है कि बोर्ड परीक्षाओं में सिर्फ सुरक्षा इंतजाम काफी नहीं, भरोसे की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।





