सीजी भास्कर, 11 जनवरी। रायपुर में सामने आए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती प्रकरण ने चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल (CGPSC Recruitment Scam) खड़े कर दिए हैं। सरकारी गवाह उत्कर्ष चंद्राकर के बयान के बाद CGPSC से जुड़े इस घोटाले की तस्वीर अब पहले से कहीं ज्यादा साफ होती नजर आ रही है। आरोप है कि आयोग के तत्कालीन शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों ने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से परीक्षा परिणामों को प्रभावित किया।
गवाह के अनुसार वर्ष 2021–22 की भर्ती प्रक्रिया में चयन सुनिश्चित कराने के लिए उम्मीदवारों से 50 से 60 लाख रुपये तक की रकम मांगी गई थी। सौदा तय होने के बाद परीक्षा से पहले चुनिंदा अभ्यर्थियों को प्रिंटेड प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए और उन्हें विशेष स्थानों पर बैठाकर रटवाया गया। इस प्रक्रिया की पहली कड़ी 12 फरवरी 2022 को रायपुर स्थित एक मैरिज पैलेस में सामने आई, जहां कई अभ्यर्थियों को एक साथ बुलाया गया।
बताया गया कि यहीं पर प्रिलिम्स परीक्षा के सवाल पहले से समझाए गए, जिसका परिणाम (CGPSC Recruitment Scam) यह हुआ कि सभी चयनित लोग प्रारंभिक परीक्षा में सफल हो गए। इसके बाद मुख्य परीक्षा के लिए यह पूरा नेटवर्क राजधानी से बाहर बारनवापारा के एक रिसॉर्ट तक फैल गया। यहां अभ्यर्थियों को फर्जी नामों से ठहराया गया, ताकि किसी को शक न हो और तैयारी निर्बाध रूप से कराई जा सके।
चार्जशीट में यह भी उल्लेख है कि प्रश्न हल कराने और उत्तर तैयार कराने के लिए बाहरी शिक्षकों की सेवाएं ली गईं। यह पूरा तंत्र केवल परीक्षार्थियों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें आयोग के भीतर बैठे प्रभावशाली लोगों के परिजन और करीबी भी शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि चयन सूची इस तरह तैयार की गई, जिससे पहले से तय नाम उसमें शामिल हो सकें।
जांच एजेंसी ने इस मामले में कई बड़े नामों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। पूर्व चेयरमैन, सचिव, उनके परिजन और बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई (CGPSC Recruitment Scam) शुरू हो चुकी है। सीबीआई की चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि कैसे एक संगठित नेटवर्क के जरिए परीक्षा प्रणाली को प्रभावित किया गया और योग्य उम्मीदवारों के अधिकार छीने गए।
यह घोटाला केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि प्रदेश के उन हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल है, जिन्होंने ईमानदारी से तैयारी की थी। प्रारंभिक परीक्षा में 29 अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराए जाने का आरोप इस बात की पुष्टि करता है कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि भरोसे के साथ किया गया बड़ा छल है।
अब सबकी निगाहें जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। युवाओं को उम्मीद है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में चयन प्रक्रिया को इस तरह प्रभावित करने वालों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।सी


