सीजी भास्कर, 28 जनवरी | छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से जुड़े CGPSC Recruitment Scam पर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस बीडी गुरु ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह प्रकरण केवल एक आपराधिक फाइल नहीं है, बल्कि इससे लाखों युवाओं की उम्मीदें, उनका करियर और भविष्य सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में न्यायिक सतर्कता बेहद ज़रूरी हो जाती है।
जमानत पर अदालत की साफ लाइन
कोर्ट ने कहा कि केवल यह तर्क देना कि आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं, जमानत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। इसी आधार पर PSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, परीक्षा उप नियंत्रक ललित गनवीर सहित तीन आरोपियों की दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला: चयन प्रक्रिया पर सवाल
जांच एजेंसियों के मुताबिक, CGPSC Recruitment Scam में आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान प्रभावशाली लोगों और रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके लिए प्रश्नपत्र लीक करने और परीक्षा प्रणाली में सुनियोजित तरीके से हेरफेर किए जाने के संकेत मिले हैं। यही कारण है कि यह मामला सामान्य भर्ती विवाद से कहीं आगे माना जा रहा है।
पद के दुरुपयोग का आरोप
सीबीआई की दलीलों में कहा गया कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि तत्कालीन अध्यक्ष ने अपने पद का इस्तेमाल करते हुए निजी लाभ के रास्ते खोले। जांच के दौरान एक निजी कंपनी से CSR मद के तहत 45 लाख रुपये एक एनजीओ को दिए जाने की बात सामने आई, जिसका सीधा संबंध अध्यक्ष के परिवार से बताया गया।
पेपर लीक की कड़ी और चयन
जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा नियंत्रक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ने वरिष्ठ निर्देशों के तहत प्रश्नपत्र बाहर पहुंचाए। ये प्रश्नपत्र आगे कुछ चुनिंदा लोगों तक पहुंचे, जिनमें परिजन भी शामिल थे। बाद में इन्हीं नामों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी जैसे पदों पर होना, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
बचाव पक्ष की दलील और अदालत का जवाब
आरोपियों की ओर से यह कहा गया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और कुछ सह-आरोपियों को राहत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर उन्हें भी जमानत दी जाए। हालांकि, अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपियों की भूमिका सक्रिय दिखाई देती है और जांच के कुछ अहम पहलू अभी शेष हैं। इस स्थिति में जमानत देना न्यायसंगत नहीं होगा।
न्यायालय का संकेत: मामला अभी खत्म नहीं
हाईकोर्ट की टिप्पणी से साफ है कि CGPSC Recruitment Scam में न्यायिक जांच को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में जांच की दिशा और सबूतों के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे, लेकिन मौजूदा चरण में राहत की कोई गुंजाइश नहीं बनती।




