सीजी भास्कर, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के चर्चित घोटाले (CGPSC Scam) में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपित टामन सिंह सोनवानी के बेटे नितेश सोनवानी, भतीजे साहिल सोनवानी, बजरंग पावर इस्पात कंपनी के निदेशक श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल और उसकी पत्नी भूमिका कटियार को जमानत दे दी है। इस फैसले को जांच एजेंसी (CBI) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
(CGPSC Scam) मामला क्या है
यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ पीएससी की 2020-2022 की भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कर चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़ा है। सीबीआई ने इस घोटाले में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, उप नियंत्रक परीक्षा ललित गणवीर, और अन्य अधिकारियों के साथ-साथ बाहरी लोगों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
आरोपों के अनुसार, पीएससी अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की थी। कई चयनित उम्मीदवारों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे उच्च प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI की दलीलें खारिज
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत का विरोध करते हुए दलील दी थी कि आरोपितों ने राज्य की प्रतिष्ठित परीक्षा प्रणाली को दूषित किया है और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है।
हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए चारों आरोपितों को राहत दी कि “मामले की जांच लगभग पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दायर की जा चुकी है, ऐसे में लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।”
नियमों में ‘हेरफेर’ से रिश्तेदारों का चयन
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, पूर्व अध्यक्ष सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों का चयन सुनिश्चित करने के लिए आयोग के नियमों में बदलाव कराया। विशेष रूप से, उन्होंने चयन प्रक्रिया से संबंधित एक खंड में ‘रिश्तेदार’ (relative) शब्द को ‘परिवार’ (family) से बदल दिया, जिससे कानूनी रूप से अपने भतीजों और करीबियों को चयन सूची में शामिल करने का रास्ता खुल गया।
जांच की वर्तमान स्थिति
फरवरी 2024 में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच CBI को सौंपी थी। इसके बाद पिछले वर्ष जुलाई में एजेंसी ने दो एफआईआर दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली। अब तक इस प्रकरण में 10 से अधिक आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, ललित गणवीर, निशा कोसले, दीपा आदिल और सुमित ध्रुव शामिल हैं। सभी आरोपितों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज है।


