सीजी भास्कर 26 अक्टूबर बलिया। (Chhath Puja Transgender Story) — सूर्य उपासना का महापर्व छठ जहां माताएं संतान की लंबी आयु और परिवार की समृद्धि के लिए करती हैं, वहीं बलिया की एक किन्नर अनुष्का पिछले आठ वर्षों से इस पर्व को समाज की भलाई के लिए समर्पित कर रही हैं। सिर पर दुपट्टा, हाथों में डाला, और मन में अटूट श्रद्धा लिए वह हर साल निर्जला व्रत रखती हैं। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर वे सभी के लिए सुख-शांति की प्रार्थना करती हैं।
गुरु से मिली प्रेरणा, समाज से मिला सम्मान
(Transgender Devotion Story) — अनुष्का बताती हैं कि उन्हें छठ करने की प्रेरणा समाज से मिली। “जब सब अपने परिवार और बच्चों के लिए व्रत करते हैं, तो मैंने सोचा कि मैं क्यों न पूरे समाज को अपना परिवार मान लूं,” वह मुस्कराते हुए कहती हैं। उनके गुरुजी भी लगातार 23 वर्षों तक यह व्रत करते रहे थे। अनुष्का उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि बलिया के लोग उन्हें प्यार और सम्मान देते हैं, और यह व्रत उसी स्नेह का प्रतिदान है।
व्रत का उद्देश्य — समाज की खुशहाली और शांति
(Social Harmony Chhath Puja) — अनुष्का की मन्नत केवल अपनी नहीं, बल्कि सबके लिए है। वे कहती हैं, “जो निर्धन हैं, उन्हें समृद्धि मिले, जिन्हें संतान का सुख नहीं मिला, उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हो, और शहर में अमन-शांति बनी रहे।” यह कहते हुए उनके चेहरे पर वही आत्मविश्वास झलकता है, जो किसी मां के चेहरे पर छठी मैया के प्रति अटूट विश्वास के साथ दिखता है।
धार्मिकता के साथ सामाजिक जागरूकता भी
(Transgender Awareness India) — अनुष्का केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी सक्रिय हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि आने वाले चुनावों में सभी नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करें और एक ऐसी सरकार चुनें जो निःस्वार्थ भाव से जनता के लिए काम करे। उनके अनुसार, “अच्छी सरकार वही है जो अपने हित नहीं, बल्कि जनता के हित में फैसले ले।”
शिक्षित और सशक्त जीवन का प्रतीक
अनुष्का न केवल आस्था की मिसाल हैं, बल्कि शिक्षित और सशक्त समाज की पहचान भी हैं। उन्होंने रविंद्र भाटिया यूनिवर्सिटी से एमए की डिग्री हासिल की है और वर्तमान में वैना (सागरपाली के पास) में निवास करती हैं। हर साल बेदुआ मोहल्ले में वह छठ पर्व का आयोजन करती हैं और समाज के हर वर्ग को उसमें शामिल होने का आमंत्रण देती हैं।





