सीजी भास्कर, 09 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को धान खरीदी का मुद्दा जोरदार तरीके (Chhattisgarh Assembly) से उठा और इस पर सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। किसानों की ऋण स्थिति, धान खरीदी के वास्तविक आंकड़े और वन अधिकार पट्टों से जुड़े मामलों को लेकर सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया।
चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार से यह स्पष्ट जानकारी मांगी कि राज्य में कुल कितने किसान कर्जदार हैं और कितने ऐसे किसान हैं जिन पर किसी प्रकार का ऋण नहीं है। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति समझने के लिए यह जानकारी बेहद जरूरी है। साथ ही वन अधिकार पट्टा पाने वाले किसानों को मिलने वाली सुविधाओं और योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए गए।
बहस के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार (Chhattisgarh Assembly) को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों से धान खरीदी को लेकर कई शिकायतें सामने आ रही हैं और कई किसान अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सदन में चर्चा के दौरान यह दावा भी किया गया कि बड़ी संख्या में किसान धान खरीदी प्रक्रिया से बाहर रह गए। विपक्ष का कहना था कि करीब 44 लाख किसानों का धान खरीदा नहीं जा सका, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक दबाव की स्थिति बनी हुई है।
मुद्दे पर लगातार हो रही तीखी बहस और जवाब से असंतोष जताते (Chhattisgarh Assembly) हुए विपक्ष ने विरोध दर्ज कराया। कुछ देर तक नारेबाजी और तकरार के बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
धान खरीदी, किसानों के कर्ज और वन अधिकार पट्टों से जुड़े मुद्दों को लेकर विधानसभा में हुई यह बहस आने वाले समय में भी राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी रह सकती है।





