सीजी भास्कर, 17 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा का माहौल मंगलवार को उस वक्त गरमा (Chhattisgarh Assembly Protest) गया, जब मनरेगा को ‘G RAM G’ किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने शून्यकाल में स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की। हालांकि आसंदी द्वारा प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने के बाद विपक्ष ने नाराजगी जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पहले की मनरेगा व्यवस्था ज्यादा प्रभावी थी और नए बदलाव गरीबों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने की बात रखी, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली।
सदन में टकराव, बयानबाजी से बढ़ा तापमान
स्थगन प्रस्ताव को लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा किसी पार्टी की राजनीति का मंच नहीं, बल्कि जनता (Chhattisgarh Assembly Protest) का मंच है और समय की बर्बादी नहीं होनी चाहिए। इस बयान के बाद माहौल और गर्म हो गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।
5 मिनट के लिए रुकी कार्यवाही, फिर भी नहीं बनी सहमति
हंगामे के बीच आसंदी को कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। हालांकि दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी विवाद थमा नहीं। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि यह सिर्फ नीति नहीं, बल्कि सरकार की मंशा का सवाल है और यह सीधे गरीबों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने दोबारा चर्चा की मांग रखी। वहीं कवासी लखमा समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए सदन में चर्चा की आवश्यकता जताई।
अग्राह्य प्रस्ताव के बाद विपक्ष का बहिष्कार
आसंदी द्वारा स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने पर विपक्षी सदस्य नाराज हो गए। इसे लोकतांत्रिक चर्चा से बचने का प्रयास बताते हुए कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट (Chhattisgarh Assembly Protest) कर दिया। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘G RAM G’ का मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।





