सीजी भास्कर, 26 मार्च। आईपीएल शुरू होने से पहले छत्तीसगढ़ में क्रिकेट सट्टे का अवैध कारोबार एक बार फिर तेजी से फैलता नजर (Chhattisgarh Betting Racket) आ रहा है। राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में सटोरियों ने ऐसा नेटवर्क खड़ा कर लिया है, जो अब गली-मोहल्लों से निकलकर पॉश कॉलोनियों, होटल, फार्महाउस और यहां तक कि छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच चुका है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार सट्टा कारोबारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एप्स के जरिए अपना दायरा और भी बड़ा कर लिया है। दावा किया जा रहा है कि सिर्फ आईपीएल के शुरुआती मैचों में ही हजारों करोड़ रुपये के सौदे तय किए जा रहे हैं।
राजधानी के कई इलाकोंशंकरनगर, समता कॉलोनी, कटोरातालाब, गुढ़ियारी, स्टेशन रोड और न्यू राजेंद्र नगरमें किराए के फ्लैटों से यह नेटवर्क संचालित हो रहा है। सटोरिए लगातार ठिकाने बदलते रहते हैं, जिससे पुलिस की पकड़ से बच सकें।
ऑनलाइन सट्टे का नया मॉडल
अब सट्टेबाजी केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रही। मोबाइल, लैपटॉप और विशेष ऐप्स के (Chhattisgarh Betting Racket) जरिए करोड़ों का लेनदेन मिनटों में हो रहा है। इंस्टेंट बैंक अकाउंट खोलकर कुछ ही समय में ट्रांजैक्शन करने और फिर अकाउंट बंद कर देने का तरीका अपनाया जा रहा है, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है।
इंटरनेशनल कनेक्शन का शक
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों तक जुड़े हो सकते हैं। खाईवालों के जरिए यह नेटवर्क संचालित होता है, जो पूरे सिस्टम को कंट्रोल करते हैं। विवाद की स्थिति में धमकी और दबाव के मामले भी सामने आते हैं।
गांव-गांव तक पहुंचा नेटवर्क
यह अवैध कारोबार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है। तिल्दा, भाटापारा, धमतरी, कांकेर, जगदलपुर और बिलासपुर जैसे क्षेत्रों में भी सटोरियों के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। छोटे कस्बों और गांवों में भी एजेंट घूम-घूमकर सट्टा खिलाने लगे हैं।
कार्रवाई के बावजूद जारी खेल
हालांकि पुलिस ने पिछले कुछ समय में कई सटोरियों को गिरफ्तार (Chhattisgarh Betting Racket) किया है, लेकिन जमानत पर बाहर आते ही वे फिर से सक्रिय हो जाते हैं। यही वजह है कि इस कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाना चुनौती बना हुआ है।
बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नेटवर्क युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। आसान कमाई के लालच में कई लोग इसमें शामिल हो रहे हैं, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर नुकसान की आशंका बढ़ रही है।
फिलहाल, यह साफ है कि आईपीएल के साथ सट्टे का यह खेल भी अपने चरम पर पहुंचने की तैयारी में है। अब देखना होगा कि इस बढ़ते नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।


