सीजी भास्कर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में 12वीं बोर्ड परीक्षा के हिंदी पेपर को लेकर उठा विवाद राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का विषय (Chhattisgarh Board Paper Controversy) बन गया।
विपक्ष ने इस मुद्दे को सदन में जोरदार तरीके से उठाते हुए सरकार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर सवाल दागे, जबकि सरकार की ओर से पेपर लीक की आशंका को खारिज करते हुए पूरे मामले को भ्रामक तरीके से सवाल वायरल करने की घटना बताया गया। इसी टकराव के बीच परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छिड़ गई है।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पहले ही कई सवालों से घिरी हुई है, और अब बोर्ड परीक्षा के पेपर से जुड़ा विवाद सामने आने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
उनका कहना था कि अगर परीक्षा से जुड़े सवाल पहले ही बाहर पहुंच रहे हैं, तो इसे सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने और मेहनत करने वाले छात्रों के साथ अन्याय करने का रास्ता खोलती हैं। इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, एफआईआर और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
देवेंद्र यादव ने यह भी कहा कि सिर्फ हिंदी पेपर ही नहीं, बल्कि अन्य विषयों को लेकर भी संदेह की स्थिति (Chhattisgarh Board Paper Controversy) बन रही है। उनके मुताबिक, अगर समय रहते पूरे मामले की तह तक नहीं पहुंचा गया, तो इससे बोर्ड परीक्षा की निष्पक्षता पर भरोसा कमजोर हो सकता है। विपक्ष ने इस मुद्दे को केवल एक वायरल मैसेज का मामला मानने से इनकार किया और इसे शिक्षा तंत्र की निगरानी और जवाबदेही से जोड़कर देखा।
दूसरी ओर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने साफ शब्दों में कहा कि प्रदेश में कहीं भी 12वीं बोर्ड का पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि आधी रात को एक छात्र संगठन द्वारा कुछ प्रश्नों को जानबूझकर व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल किया गया,
जिससे भ्रम फैलाया गया। मंत्री ने कहा कि मामले की जांच के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को निर्देश दिए गए हैं और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी या जिम्मेदारी तय होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि जांच से पहले पेपर लीक जैसे गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है, जबकि विपक्ष यही तर्क दे रहा है कि जब प्रश्न परीक्षा से पहले वायरल होने की चर्चा है, तो इस मामले को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यही वजह है कि सदन में यह मुद्दा सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता का सवाल बन गया।
पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मामलों में सरकार और शिक्षा विभाग पर भरोसा बनाए रखना आसान (Chhattisgarh Board Paper Controversy) नहीं होगा, जब तक जांच पूरी पारदर्शिता के साथ सामने नहीं आती।
छात्र और अभिभावक अब यह जानना चाहते हैं कि वायरल हुए प्रश्नों और असली परीक्षा के बीच क्या संबंध था, किस स्तर पर लापरवाही हुई और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी। फिलहाल सदन में उठी यह आवाज शिक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाने वाली साबित हो रही है।





