रायपुर। Chhattisgarh Budget 2026 में इस बार सरकार ने ‘संकल्प’ थीम के जरिए यह जताने की कोशिश की कि नीतियों से लेकर निवेश तक, हर कदम का हिसाब खुलकर सामने रखा जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में करीब दो घंटे के भाषण में उन सेक्टरों पर फोकस किया, जहां (CG Budget Analysis) के मुताबिक अगले साल विकास की रफ्तार तेज करने की योजना है।
आमदनी कम, खर्च ज्यादा—घाटे की तस्वीर साफ
इस बजट में राज्य की कुल आय करीब 1.43 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा गया है, जबकि खर्च 1.72 लाख करोड़ रुपये तक जाने की बात कही गई है। नतीजा, Chhattisgarh Budget 2026 में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा सामने आता है, जो राज्य के जीएसडीपी का लगभग 2.87 प्रतिशत बैठता है। सरकार का दावा है कि यह घाटा (State Budget Allocation) के संतुलन के साथ मैनेज किया जाएगा।
राज्य, केंद्र और कर्ज का रोल
आय के स्रोतों पर नजर डालें तो Chhattisgarh Budget 2026 में राज्य के अपने संसाधनों से बड़ी हिस्सेदारी दिखाई देती है, वहीं केंद्र से मिलने वाली हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण मानी गई है। इसके अलावा पूंजीगत प्राप्तियों और ऋण के जरिए सरकार ने (Sai Government Third Budget) को संभालने का रोडमैप तैयार किया है, ताकि विकास कार्यों की रफ्तार थमे नहीं।
योजनाएं, निर्माण और बुनियादी ढांचा
व्यय की तस्वीर देखें तो Chhattisgarh Budget 2026 में राजस्व व्यय सबसे बड़ा हिस्सा लेता है, जबकि पूंजीगत व्यय के जरिए सड़कों, भवनों और सार्वजनिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार का कहना है कि (public infrastructure funding) बढ़ाने से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे और क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा।
शिक्षा और ग्रामीण विकास आगे
इस बजट का बड़ा हिस्सा विभागीय आवंटन में गया है। Chhattisgarh Budget 2026 के तहत स्कूल शिक्षा और पंचायत-ग्रामीण विकास जैसे विभागों को सबसे ज्यादा फंड मिला है। इसके अलावा कृषि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, महिला एवं बाल विकास, लोक निर्माण, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे सेक्टर भी (department-wise budget) में अहम स्थान पर रहे हैं।
किसान, महिला और गरीब केंद्र में
योजनाओं की बात करें तो Chhattisgarh Budget 2026 में कृषक उन्नति योजना पर सबसे ज्यादा खर्च प्रस्तावित है। इसके साथ महतारी वंदन योजना, मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना, ऊर्जा सब्सिडी और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे कार्यक्रमों के जरिए सरकार ने (welfare schemes funding) को मजबूत करने का दावा किया है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।






