Chhattisgarh Budget Session 2047 Vision: बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल रमेन डेका के अभिभाषण से हुई। मंच से सरकार की उपलब्धियों के साथ आने वाले वर्षों की दिशा रखी गई—किसान, महिला व जनजातीय सशक्तिकरण से लेकर स्वास्थ्य-शिक्षा, अधोसंरचना विस्तार और प्रशासनिक सुधार तक। अभिभाषण का केंद्रबिंदु रहा Viksit Chhattisgarh 2047 Vision—यानी 2047 तक राज्य को विकसित प्रदेश के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य।
किसान-आय, मिलेट्स और कृषि नवाचार
कृषि क्षेत्र में समर्थन मूल्य, बीज-आत्मनिर्भरता और फसल विविधीकरण पर ज़ोर दिया गया। मिलेट्स, दलहन-तिलहन को बढ़ावा, जैविक खेती के विस्तार और कृषि-प्रसंस्करण के जरिए मूल्यवर्धन की रणनीति बताई गई। निर्यात-उन्मुख सोच के साथ शेल्फ-लाइफ बढ़ाने वाले शोध केंद्रों का उल्लेख भी हुआ—ताकि किसान की कमाई बाज़ार तक बेहतर पहुँचे।
कनेक्टिविटी, सेवाएँ और भरोसे की बहाली
नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क-पुल, मोबाइल टॉवर, स्वास्थ्य-शिक्षा ढांचे और बुनियादी सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई। Bastar Development Plan के तहत दूरस्थ गांवों तक कनेक्टिविटी, डीटीएच और हाई-मास्ट लाइटिंग जैसी सुविधाएँ पहुँचाने की प्रगति बताई गई। आत्मसमर्पण नीति, पुनर्वास और ‘नियद नेल्ला नार’ जैसे अभियानों से भरोसा बहाली का दावा किया गया।
सुरक्षा-विकास की समानांतर रणनीति
सरकार ने बताया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के साथ-साथ विकास योजनाएँ समानांतर चल रही हैं। Naxal Eradication Drive के अंतर्गत न्यूट्रलाइजेशन, आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि हिंसा-मुक्त क्षेत्रों में अब सेवाओं की पहुँच तेज़ हुई है—टीकाकरण, स्कूल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क मजबूत हुआ है।
निवेश, सिंगल-विंडो और जॉब क्रिएशन
नई औद्योगिक नीति, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और ईज़-ऑफ-डूइंग-बिज़नेस सुधारों के जरिए निवेश आकर्षित करने की बात रखी गई। सेमीकंडक्टर, आईटी, फार्मा, एआई जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावों का उल्लेख हुआ; स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोज़गार सृजन पर फोकस बताया गया।
आयुष्मान, मेडिकल कॉलेज और एजु-हब
स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान कवरेज, सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार की योजना रखी गई। शिक्षा में नवा रायपुर को एजु-हब के रूप में विकसित करने, विज्ञान-स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्किल-अपग्रेडेशन कार्यक्रमों से युवाओं को राज्य में ही अवसर देने की दिशा बताई गई।
पारदर्शिता, ई-फाइल और राजस्व सुधार
डिजिटल गवर्नेंस के तहत ई-फाइल, बायोमेट्रिक अटेंडेंस, ऑटो-डायवर्सन और स्व-नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं से लालफीताशाही घटाने की बात कही गई। राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और जियो-रेफरेंसिंग से ज़मीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने का रोडमैप सामने आया।
बस्तर पंडुम से वैश्विक पहचान
पर्यटन और संस्कृति को आर्थिक इंजन के रूप में पेश किया गया—बस्तर पंडुम, आदिवासी कला-संस्कृति के संरक्षण, डिजिटल संग्रहालय और फिल्म सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स का उल्लेख हुआ। उद्देश्य—स्थानीय पहचान को वैश्विक मंच तक पहुँचाना, और रोज़गार के नए रास्ते खोलना।






