सीजी भास्कर, 30 दिसंबर | Chhattisgarh Cold Wave : छत्तीसगढ़ में ठंड का असर अब साफ दिखने लगा है। उत्तर और मध्य हिस्सों में बह रही सर्द हवाओं ने तापमान को तेजी से नीचे धकेला है। सरगुजा अंचल और मैनपाट जैसे पहाड़ी इलाकों में ओस की बूंदें जमकर बर्फ का रूप लेती नजर आईं। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है।
मैनपाट में 2 डिग्री पर पहुंचा पारा
राज्य के ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में रात का न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यहां सुबह के समय खुले इलाकों में बर्फ की परत साफ देखी गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इतनी ठंड इस सीजन में पहली बार महसूस की जा रही है।
दुर्ग-रायपुर में सामान्य से काफी नीचे तापमान
मैदानी जिलों में भी ठंड का असर कम नहीं है। दुर्ग में रात का तापमान सामान्य से 5.3 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया, जबकि रायपुर में यह गिरावट 4.2 डिग्री तक पहुंची। रात और सुबह के समय ठिठुरन के चलते लोग अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं।
शीतलहर की चेतावनी, अगले 24 घंटे अहम
मौसम विभाग ने उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में अगले 24 घंटों के दौरान शीतलहर चलने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, ठंडी और शुष्क हवाएं फिलहाल इसी तरह बनी रह सकती हैं। (Chhattisgarh Cold Wave)
अंबिकापुर सबसे ठंडा, जगदलपुर रहा गर्म
बीते 24 घंटों में अंबिकापुर प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं जगदलपुर में अधिकतम तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखने को मिला।
आने वाले दिनों में मिल सकती है राहत
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगले पांच दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी संभव है। इससे प्रदेश को कड़ाके की ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है।
बच्चों की सेहत पर ठंड का दबाव
लगातार गिरते तापमान का असर बच्चों की सेहत पर भी दिख रहा है। राजधानी रायपुर सहित कई जिलों के अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा होता है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है।
नवजातों में बढ़ा हाइपोथर्मिया का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शिशुओं में हाइपोथर्मिया का जोखिम अधिक रहता है, खासकर सिजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में। तापमान अचानक गिरने पर कई मामलों में एनआईसीयू और एसएनसीयू तक में इलाज की जरूरत पड़ रही है।
ओपीडी में बढ़ रही मरीजों की संख्या
ठंड के चलते सर्दी-खांसी, वायरल फीवर और सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ रही है। मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभागों में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।


