सीजी भास्कर, 04 फरवरी। छत्तीसगढ़ के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया (Chhattisgarh Eco Tourism) जा रहा है। कबीरधाम जिले में स्थित ऐतिहासिक भोरमदेव क्षेत्र, जिसे ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहा जाता है, अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां पर्यटकों को जंगल सफारी का रोमांचक अनुभव भी मिलेगा।
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में भोरमदेव अभ्यारण्य में जंगल सफारी शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। इस पहल से राज्य में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही वन्यजीव संरक्षण को लेकर जनजागरूकता भी मजबूत होगी।
34 किलोमीटर का रोमांचक सफारी रूट
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के निर्देशन में तैयार इस परियोजना के तहत करीब 34 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग विकसित (Chhattisgarh Eco Tourism) किया गया है। सफारी के दौरान पर्यटक गौर, चीतल, सांभर, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकेंगे।
इस सफारी की खास पहचान सकरी नदी मार्ग होगा, जहां सफर के दौरान लगभग 17 बार नदी पार करने का अनोखा और रोमांचक अनुभव मिलेगा। यह मार्ग मैकल पर्वतमाला के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए यादगार यात्रा साबित होगी।
स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना में स्थानीय सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। जंगल सफारी वाहनों का संचालन वन प्रबंधन समिति थंवरझोल (Chhattisgarh Eco Tourism) द्वारा किया जाएगा, जिससे आसपास के ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वन विभाग द्वारा सफारी को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
जंगल सफारी शुरू होने के बाद भोरमदेव आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन के साथ-साथ वन्य जीवन और प्रकृति के रोमांच का भी आनंद ले सकेंगे। इससे भोरमदेव को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।




