सीजी भास्कर, 1 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी हलचल तेज (Chhattisgarh High Court) कर दी है। हाईकोर्ट में हुई ताजा सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी रहे अमित जोगी की ओर से समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे सख्ती से खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब इस मामले में और देरी नहीं होगी और अगली तारीख पर अंतिम सुनवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में चल रही इस सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि मामला अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इस पर फैसला आ सकता है। पूरे प्रदेश की नजरें अब कल होने वाली सुनवाई पर टिक गई हैं।
दो दशक पुराने मामले में फिर तेज हुई सुनवाई
यह मामला साल 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने उस समय प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।
जांच के बाद इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो लोग सरकारी गवाह (Chhattisgarh High Court) बन गए थे। निचली अदालत ने 2007 में 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद फिर खुला मामला
अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामावतार जग्गी के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया, ताकि पूरे मामले की मेरिट पर विस्तार से विचार किया जा सके। इसके बाद से यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है और अब अंतिम बहस के बाद फैसले की स्थिति में पहुंच गया है।
कोर्ट ने साफ किया-अब नहीं मिलेगी राहत
ताजा सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से अतिरिक्त समय की मांग की गई, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अब इस केस में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट के इस रुख से साफ है कि न्यायिक प्रक्रिया को अब अंतिम चरण तक तेजी से पहुंचाया जाएगा।
अंतिम सुनवाई से पहले मिली जमानत
इस बीच, मामले के मुख्य आरोपी रहे अमित जोगी को रायपुर की निचली अदालत से जमानत (Chhattisgarh High Court) मिल चुकी है। उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी गई है। हालांकि यह राहत अस्थायी मानी जा रही है, क्योंकि अंतिम फैसला अभी हाईकोर्ट में होना बाकी है।
क्यों अहम है यह फैसला
जग्गी हत्याकांड प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है, जिसमें राजनीति, अपराध और न्यायिक प्रक्रिया तीनों का गहरा असर देखने को मिला है। इस केस के फैसले का असर न केवल आरोपियों पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश की राजनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी निगाहें कल होने वाली अंतिम सुनवाई पर हैं, जहां यह तय होगा कि इस लंबे समय से चले आ रहे मामले का अंत किस दिशा में होगा।


