सीजी भास्कर, 17 फरवरी। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की पूर्व सेवाओं को भर्ती प्रक्रिया में नजरअंदाज (Chhattisgarh High Court Order) नहीं किया जा सकता। अदालत ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों की भर्ती के दौरान अनुभव के आधार पर उचित वेटेज देने के निर्देश दिए हैं।
मामला National Education Society for Tribal Students (NESTS) द्वारा जारी केंद्रीय भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ता वर्ष 2016 से 2024 के बीच छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में संचालित EMRS विद्यालयों में PGT और TGT के रूप में कार्यरत रहे हैं।
सभी याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एके प्रसाद ने कहा कि कई शिक्षकों ने छह वर्ष से अधिक समय तक दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में निष्ठापूर्वक (Chhattisgarh High Court Order) सेवा दी है। न्यायालय ने माना कि अस्थायी या अतिथि सेवा से स्वतः नियमितीकरण का अधिकार उत्पन्न नहीं होता, लेकिन न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की दृष्टि से उनकी लंबी सेवा को पूरी तरह नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
अदालत ने निर्देश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान याचिकाकर्ताओं के अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें उपयुक्त अंक (weightage) दिए जाएं और पात्रता की शर्तें पूरी होने पर नियुक्ति पर विचार किया जाए।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश स्वतः नियमित नियुक्ति का निर्देश (Chhattisgarh High Court Order) नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायसंगत हो। इस फैसले को आदिवासी अंचलों में वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।





