Chhattisgarh High Court Promotion Verdict 2026 : Chhattisgarh High Court ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि पदोन्नति किसी भी कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है। इसी टिप्पणी के साथ कोर्ट ने नगरीय प्रशासन विभाग के 2017 के भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।
RI से CMO पदोन्नति को संवैधानिक बताया
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि राजस्व निरीक्षकों को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) क्लास-बी पद पर पदोन्नति के लिए पात्र मानना पूरी तरह संवैधानिक है। इससे किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।
समानता के अधिकार का तर्क नहीं हुआ स्वीकार
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सिविल पदों पर कार्यरत अधिकारी और राजस्व निरीक्षक अलग-अलग श्रेणियों के हैं, ऐसे में दोनों को समान मानकर पदोन्नति देना Article 14 और Article 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
सरकार के नीति अधिकार क्षेत्र में फैसला
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि पदोन्नति के लिए एक से अधिक फीडर कैडर तय करना और पदों की समकक्षता निर्धारित करना सरकार के नीति अधिकार क्षेत्र में आता है। किसी कर्मचारी को केवल पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार होता है, न कि पदोन्नति पाने का।
अनुभव में छूट को भी माना वैध
कोर्ट ने यह भी माना कि राजस्व निरीक्षकों को अनुभव में एक साल की छूट देना अवैध नहीं है। सरकार ने इसे अधिकारियों की कमी को देखते हुए जनहित में लिया गया निर्णय बताया था, जिसे अदालत ने सही ठहराया।
याचिकाएं निराधार, प्रमोशन का रास्ता साफ
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। इसलिए याचिकाएं निराधार हैं और खारिज की जाती हैं। इस फैसले के बाद राजस्व निरीक्षकों के लिए नगरीय निकायों में CMO पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।


