सीजी भास्कर, 27 मार्च। छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण फैसले में Chhattisgarh High Court ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी गवाह की विश्वसनीयता उसके शारीरिक हालात (Chhattisgarh High Court Rape Case) से तय नहीं होती। अदालत ने मूक-बधिर पीड़िता की गवाही को पूर्ण रूप से वैध मानते हुए दुष्कर्म के आरोपी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
संकेतों से दी गई गवाही भी वैध
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि कोई व्यक्ति बोल या सुन नहीं सकता, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी गवाही अमान्य हो जाएगी। संकेतों, इशारों या अन्य माध्यमों से दी गई जानकारी भी कानूनी रूप से मौखिक साक्ष्य मानी जाएगी, यदि वह भरोसेमंद और सुसंगत हो।
क्या था पूरा मामला?
घटना बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र की है, जहां 19 वर्षीय मूक-बधिर युवती के साथ उसके ही रिश्तेदार ने घर (Chhattisgarh High Court Rape Case) में घुसकर दुष्कर्म किया। पीड़िता के माता-पिता उस समय घर पर नहीं थे। घटना के बाद युवती ने अपनी मां को इशारों में पूरी आपबीती बताई, जिसके आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
अदालत में अनोखे तरीके से दर्ज हुई गवाही
सुनवाई के दौरान पीड़िता की स्थिति को देखते हुए अदालत ने विशेष व्यवस्था की। साइन लैंग्वेज विशेषज्ञ की मदद ली गई और जहां आवश्यक हुआ, वहां प्लास्टिक की गुड़िया के जरिए पीड़िता ने घटना को संकेतों में समझाया। इस प्रक्रिया के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया था।
हाईकोर्ट ने फैसले को सही ठहराया
मामले में अपील पर सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच, जिसमें Ramesh Sinha और Ravindra Kumar Agrawal शामिल थे, ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही माना। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद है और मेडिकल व फॉरेंसिक रिपोर्ट भी घटना की पुष्टि करती है।
आरोपी को उम्रकैद, जुर्माना भी
अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 376(2) के तहत मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा (Chhattisgarh High Court Rape Case) सुनाई है। इसके साथ ही धारा 450 के तहत 5 साल की सजा और 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
न्याय व्यवस्था के लिए अहम संदेश
यह फैसला न्याय प्रणाली में समावेशिता और संवेदनशीलता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया कि न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति को समान रूप से है, चाहे वह किसी भी शारीरिक स्थिति में क्यों न हो।


