सीजी भास्कर, 06 मार्च। गांव में कोटवार की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते (Chhattisgarh Kotwar Appointment Case) हुए High Court of Chhattisgarh ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि पूर्व कोटवार के निकट संबंधी को नियुक्ति में वरीयता देना अनिवार्य नहीं है और यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकल पीठ ने सुनवाई के बाद स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता 1959 की धारा 230 के तहत कोटवार की नियुक्ति निर्धारित वैधानिक नियमों के अनुसार होती है। नियम 4(2) के अनुसार पूर्व कोटवार के रिश्तेदार को प्राथमिकता देना केवल विवेकाधीन व्यवस्था है, इससे किसी को नियुक्ति का स्वतः अधिकार प्राप्त नहीं होता।
राजस्व मंडल के आदेश को कोर्ट ने माना सही
यह मामला याचिकाकर्ता परदेशी राम द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा था। उन्होंने Chhattisgarh Revenue Board द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी थी। राजस्व मंडल ने अपने फैसले में रामबिहारी साहू की कोटवार पद पर नियुक्ति को वैध ठहराया था।
हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल के आदेश का अध्ययन करने के बाद पाया कि उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या अवैधता (Chhattisgarh Kotwar Appointment Case) नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक प्रशासनिक निर्णय में स्पष्ट त्रुटि या कानून का उल्लंघन साबित न हो, तब तक संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
नियुक्ति प्रक्रिया का मामला
दरअसल, ग्राम गनियारी में कोटवार पद पर कार्यरत खेलन दास पनिका के निधन के बाद यह पद रिक्त हुआ था। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई। याचिकाकर्ता परदेशी राम और रामबिहारी साहू दोनों ने आवेदन किया था, लेकिन सक्षम प्राधिकारी ने रामबिहारी साहू को कोटवार नियुक्त कर दिया।
इस नियुक्ति को लेकर मामला एसडीएम, आयुक्त और राजस्व मंडल तक पहुंचा। अंततः राजस्व मंडल ने रामबिहारी की नियुक्ति को सही ठहराते हुए उन्हें स्थायी कोटवार के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने इन तथ्यों को भी माना महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य भी सामने आया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज थे और उसके चरित्र को लेकर शिकायतें भी की गई थीं। वहीं चयनित उम्मीदवार रामबिहारी साहू के खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं पाया गया।
कोर्ट ने यह भी माना कि नियुक्ति के समय याचिकाकर्ता की उम्र लगभग 54 वर्ष थी, जबकि कोटवार पद के लिए सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष (Chhattisgarh Kotwar Appointment Case) निर्धारित है। इसके अलावा रामबिहारी अधिक शिक्षित थे और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए अधिक उपयुक्त पाए गए।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कोटवार का पद सरकारी पद है और इस पर नियुक्ति केवल पात्रता, चरित्र और उपयुक्तता के आधार पर ही की जा सकती है। केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर किसी को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल सकता। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की रिट याचिका खारिज कर दी और राजस्व मंडल के फैसले को बरकरार रखा।





