सीजी भास्कर, 10 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले (Chhattisgarh Liquor Scam) में जांच एजेंसियों की सक्रियता लगातार तेज होती जा रही है। झारखंड एसीबी द्वारा कारोबारी केडिया की गिरफ्तारी के बाद अब प्रदेश की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। EOW ने जेल में बंद कारोबारी अनवर ढेबर और तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ के लिए कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट दाखिल कर दिया है।
इससे पहले इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों आरोपियों (Chhattisgarh Liquor Scam) से पूछताछ कर चुकी है। अब EOW आमने-सामने बैठाकर पूछताछ के जरिए पूरे सिंडिकेट की परतें खोलने की तैयारी में है। EOW अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अनवर ढेबर पर प्रदेश में शराब कारोबार का पूरा सिंडिकेट संचालित करने का गंभीर आरोप है। वहीं, केके श्रीवास्तव पर इस अवैध नेटवर्क से अर्जित पैसों को अलग-अलग माध्यमों से छुपाने, लेन-देन और मैनेजमेंट की भूमिका निभाने का संदेह जताया गया है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि दोनों से एक साथ पूछताछ करने पर घोटाले से जुड़े कई अहम राज और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला
जांच एजेंसियों (Chhattisgarh Liquor Scam) के अनुसार, कांग्रेस सरकार के कार्यकाल 2019 से 2023 के बीच राज्य की शराब नीति में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे कुछ पसंदीदा कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचाया गया। शराब लाइसेंस की शर्तें इस तरह तय की गईं कि सीमित सप्लायरों को ही ठेका मिल सके और प्रतियोगिता को जानबूझकर सीमित किया गया।
इन्हीं कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के जरिए नकली होलोग्राम और सील तैयार करवाईं। इसके बाद सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से इन्हीं नकली होलोग्राम लगी महंगी शराब की बिक्री कराई गई। चूंकि इस बिक्री का पूरा डेटा शासन तक नहीं पहुंच पाया, इसलिए बड़े पैमाने पर बिना एक्साइज टैक्स के शराब बेची जाती रही।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया के कारण राज्य सरकार को करीब 2165 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हुआ। यही कारण है कि इस मामले में ED, EOW और ACB जैसी एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


