सीजी भास्कर, 13 दिसंबर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयासों से छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड (Chhattisgarh Makhana Board) में शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश में मखाना की खेती को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड (Chhattisgarh Makhana Board) में शामिल होने के बाद राज्य के किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में संगठित सहयोग मिलेगा। यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
हाल ही में धमतरी जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में हो रहे मखाना उत्पादन की सराहना करते हुए राज्य को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि (Makhana Farming Promotion) के तहत किसानों को वैज्ञानिक तकनीक, जल प्रबंधन, आधुनिक प्रसंस्करण और बाजार तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।
इसी क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव शहला निगार की अध्यक्षता में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में संचालक उद्यानिकी लोकेश कुमार ने जानकारी दी कि भारत सरकार ने वर्ष 2025-26 से “सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना” शुरू की है, जिसमें शत-प्रतिशत केंद्रीय अनुदान का प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत वर्ष 2025-26 के लिए प्रारंभिक चार माह हेतु 180 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। तालाब में मखाना की खेती करने वाले किसानों को 1.79 लाख रुपये की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी 72 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं खेत में मखाना उत्पादन (Makhana Subsidy Scheme) करने वाले किसानों को 1.32 लाख रुपये की लागत पर 40 प्रतिशत यानी 53 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। नए तालाब निर्माण पर 7 लाख रुपये की लागत के विरुद्ध 2.80 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
मखाना के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो लेवल मखाना प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना पर 10 लाख रुपये की इकाई लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। एफपीओ के लिए स्मॉल लेवल प्रसंस्करण यूनिट पर 39 लाख रुपये की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा, जबकि निजी क्षेत्र के लिए यही अनुदान 35 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। लार्ज लेवल (Makhana Processing Unit) की स्थापना पर 7 करोड़ रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण, एक्सपोजर विजिट और विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदर्शन प्लॉट के माध्यम से तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। इससे छत्तीसगढ़ को देश के उभरते मखाना उत्पादक राज्यों की सूची में मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।


