सीजी भास्कर, 29 दिसंबर | छत्तीसगढ़ में आज से (Chhattisgarh Nursing Strike) के कारण सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ ने 29, 30 और 31 दिसंबर को निश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ ने आंदोलन में शामिल होने के लिए औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली है।
चरणबद्ध आंदोलन का निर्णायक मोड़
यह आंदोलन कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के चरणबद्ध कार्यक्रम का चौथा चरण है। इससे पहले ज्ञापन, काली पट्टी लगाकर कार्य, और अस्पताल परिसरों में प्रतीकात्मक प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन शासन स्तर पर अब तक ठोस पहल नहीं होने का आरोप लगाया गया है। संघ का कहना है कि यदि इस बार भी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखी, तो (Chhattisgarh Nursing Strike) अनिश्चितकालीन रूप ले सकता है।
जरूरी सेवाएं रहेंगी चालू
आंदोलन के बावजूद नर्सिंग संघ ने स्पष्ट किया है कि गंभीर मरीजों की देखभाल प्रभावित नहीं होगी। आवश्यक संख्या में नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद रहेगा। अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रशासन के आग्रह पर आंदोलन के दौरान भी सेवाएं जारी रखी गईं, जिससे आपात व्यवस्थाओं को राहत मिली।
भर्ती और पदोन्नति सबसे बड़ी मांग
नर्सिंग संवर्ग का कहना है कि राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में सैकड़ों पद खाली पड़े हैं। स्वीकृत पदों के मुकाबले स्टाफ की भारी कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव है। संघ ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया तेज करने की मांग को (Chhattisgarh Nursing Strike) का प्रमुख मुद्दा बताया है।
वेतन और भत्तों में समानता की मांग
नर्सिंग ऑफिसर्स केंद्र सरकार के अनुरूप नर्सिंग और वाशिंग अलाउंस की मांग कर रहे हैं। साथ ही संविदा और डेली वेज कर्मचारियों को नियमित करने, समान कार्य के लिए समान वेतन देने की बात भी आंदोलन के केंद्र में है। संघ का तर्क है कि उच्च योग्यता के बावजूद नर्सिंग स्टाफ को अपेक्षित वेतनमान नहीं मिल पा रहा।
कामकाजी नर्सों के लिए बुनियादी सुविधाएं
आंदोलन में शामिल नर्सों ने ड्यूटी के दौरान बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच, परिवार के लिए कैशलेस इलाज, और मरीजों के परिजनों के लिए ठहरने व भोजन की सुविधा जैसी मांगें भी उठाई हैं। उनका कहना है कि ये सुविधाएं सीधे तौर पर अस्पतालों की कार्यक्षमता से जुड़ी हैं।
लंबे संघर्ष का आरोप
नर्सिंग संघ का दावा है कि पिछले एक दशक से संवर्ग अपने पेशे के सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। समाधान की जगह अक्सर चेतावनी पत्र और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ा है। इसी कारण अब (Chhattisgarh Nursing Strike) को निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
तीन दिन का यह आंदोलन प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अहम परीक्षा साबित हो सकता है। अगर बातचीत का रास्ता नहीं निकला, तो अनिश्चितकालीन आंदोलन से अस्पतालों की नियमित सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।






