सीजी भास्कर 3 फ़रवरी Chhattisgarh Patient Rights: छत्तीसगढ़ में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए एक अहम राहत भरा फैसला सामने आया है। अब निजी अस्पतालों में भर्ती या इलाज करा रहे मरीजों को अस्पताल परिसर में मौजूद फार्मेसी से ही दवाएं खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।
आदेश हुआ लागू
जारी आदेश के अनुसार, सभी निजी अस्पतालों में संचालित मेडिकल स्टोर्स को स्पष्ट रूप से यह सूचना प्रदर्शित करनी होगी कि “यहां से दवा खरीदना अनिवार्य नहीं है”। यह तख्ती सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली जगह पर लगाना जरूरी होगा।
मनमानी पर लगेगा अंकुश
अब तक यह शिकायत आम थी कि अस्पतालों के डॉक्टर जिस दवा का पर्चा लिखते हैं, वही दवा अस्पताल की फार्मेसी में एमआरपी पर ही उपलब्ध कराई जाती थी। कई मामलों में मरीजों और उनके परिजनों पर बाहरी मेडिकल स्टोर से दवा न खरीदने का दबाव भी बनाया जाता था। नए आदेश से इस तरह की मनमानी पर रोक लगने की उम्मीद है।
सेटिंग सिस्टम पर सवाल
वर्तमान में अधिकांश बड़े और मध्यम निजी अस्पतालों की अपनी फार्मेसी संचालित होती है। वहीं, छोटे अस्पताल और क्लीनिकों में बाहरी मेडिकल स्टोर्स से कथित समझौते के चलते मरीजों को तय दुकानों से दवा लेने के लिए मजबूर किया जाता रहा है। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था मरीजों के हितों के खिलाफ है।
जिलों को दिए गए निर्देश
खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से सभी जिलों के सहायक औषधि नियंत्रकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं और किसी भी तरह की बाध्यता की शिकायत मिलने पर कार्रवाई करें।
डिप्टी सीएम का बयान
इस फैसले पर डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार जनहित से जुड़े मामलों में लगातार निर्णय ले रही है। मरीजों से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि इलाज के दौरान अनावश्यक आर्थिक दबाव न बने।




