सीजी भास्कर, 4 नवंबर। छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बेमेतरा, गरियाबंद और बस्तर जिलों में बिजली आपूर्ति को और मजबूत व आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इन छह जिलों में कुल नौ नए बिजली सब-स्टेशन शुरू किए गए हैं। लगभग 480 करोड़ रुपये की लागत से बने ये सब-स्टेशन अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जिनमें हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर और स्मार्ट ग्रिड सिस्टम (Chhattisgarh Power Substation Project) का इस्तेमाल किया गया है।
इस परियोजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर की। इस योजना से अब इन जिलों में रहने वाले करीब 15 लाख लोगों को बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलेगी। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए सब-स्टेशनों के संचालन से शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और स्थिरता में बड़ा सुधार होगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन सब-स्टेशनों के निर्माण से बिजली वितरण प्रणाली और ट्रांसमिशन नेटवर्क दोनों में दक्षता बढ़ेगी। हाई-वोल्टेज ट्रांसफार्मर की मदद से वोल्टेज स्थिर रहेगा और स्मार्ट ग्रिड तकनीक के जरिए बिजली की निगरानी और नियंत्रण रियल टाइम में किया जा सकेगा। इससे न केवल लाइन लॉस में कमी आएगी, बल्कि बिजली की बर्बादी पर भी अंकुश लगेगा। यह तकनीक (Chhattisgarh Power Substation Project) उपभोक्ताओं को अबाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना से बिजली वितरण नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इससे उद्योग, व्यापार और आम उपभोक्ता, सभी को स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
इसके साथ ही, राज्य में Revamped Distribution Sector Scheme (आरडीएसएस) के तहत कांकेर और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलों में 1,415 करोड़ रुपये की लागत से नए सब-स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनें भी तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं से प्रदेश के बिजली नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ ट्रांसमिशन क्षमता में व्यापक सुधार होगा।
राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद छत्तीसगढ़ में बिजली की स्थिति और बेहतर हो जाएगी। यह राज्य को ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बिजली से जुड़ी यह पहल (Chhattisgarh Power Substation Project) अब छत्तीसगढ़ की ऊर्जा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और सक्षम बनाएगी।
विकास की नई राह बनेगी
छत्तीसगढ़ के लिए एनएच-130डी सड़क परियोजना (NH-130D Road Project) आने वाले वर्षों में विकास और सुरक्षा दोनों दृष्टियों से बेहद अहम साबित होने जा रही है। यह सड़क अबूझमाड़ के घने जंगलों को पार करते हुए महाराष्ट्र तक जाएगी। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर महाराष्ट्र के अलापल्ली तक पहुंचेगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है।
वर्तमान में इस सड़क का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इसके पहले चरण में कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर के हिस्से के लिए 152 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण स्वीकृत किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस सड़क के तैयार हो जाने से नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की गति बढ़ेगी और अबूझमाड़, नारायणपुर व महाराष्ट्र के भीतरी क्षेत्रों के बीच सीधा सड़क संपर्क स्थापित होगा।
यह सड़क न केवल परिवहन बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के लिहाज से भी बड़ा बदलाव लाएगी। इस मार्ग से लोगों की बाजार, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। अबूझमाड़ जैसे कठिन इलाकों में लंबे समय से संपर्क की कमी विकास में बड़ी बाधा रही है, लेकिन इस परियोजना के बन जाने के बाद बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।
एनएच-130डी सड़क को दो-लेन पाव्ड शोल्डर (Two Lane Paved Shoulder) के रूप में तैयार किया जा रहा है ताकि किसी भी मौसम में यातायात सुचारू रूप से चल सके। यह सड़क छत्तीसगढ़ के अंदरूनी इलाकों को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ते हुए नई आर्थिक संभावनाएं खोलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली और सड़क जैसी परियोजनाओं का एक साथ विकास राज्य के समग्र बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ऊर्जा, सड़क और संचार जैसे क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य एक-दूसरे से जुड़कर छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम राज्य बनाएँ। बिजली और सड़क दोनों परियोजनाएं राज्य की प्रगति की दिशा में नई रफ्तार जोड़ रही हैं।


