सीजी भास्कर, 27 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर इस वर्ष रजत जयंती राज्योत्सव (Chhattisgarh Rajyotsav 2025) मना रहा है। इस अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव में कृषि विभाग अपनी प्रदर्शनी के माध्यम से राज्य के 25 वर्षों के कृषि विकास की यात्रा को प्रस्तुत करेगा। इस प्रदर्शनी में धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेती से लेकर आधुनिक तकनीकों तक की कहानी देखने को मिलेगी।
रसायन मुक्त खेती की दिशा में कदम
राज्य सरकार अब किसानों को रसायन-मुक्त खेती (Organic Farming) की दिशा में प्रेरित कर रही है। इसके लिए पीएम-प्रणाम कार्यक्रम, परम्परागत कृषि विकास योजना और जैविक खेती मिशन के तहत किसानों को जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। “ड्रोन दीदी अभियान” के माध्यम से उर्वरक की कमी का समाधान किया जा रहा है, जबकि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है।
सिंचाई और जल प्रबंधन में बड़ा विस्तार
छत्तीसगढ़ में सिंचाई क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2000 में जहां केवल 1042 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई पर निर्भर था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 1892 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म सिंचाई योजना, एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन और पर ड्रॉप मोर क्रॉप जैसी योजनाओं ने सिंचाई दक्षता में क्रांतिकारी सुधार किया है।
धान उपार्जन में छत्तीसगढ़ अग्रणी
राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। धान उपार्जन के लिए समर्थन मूल्य देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
25 वर्षों में कृषि क्षेत्र का रिकॉर्ड विस्तार
वर्ष 2000 में राज्य की कुल कृषि भूमि 5408 हजार हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 6727 हजार हेक्टेयर हो गई है।
खरीफ फसलों का क्षेत्र 4636 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 4865 हजार हेक्टेयर, और धान का क्षेत्र 3795 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 3981 हजार हेक्टेयर हो गया है।
रबी फसलों का क्षेत्र 772 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1862 हजार हेक्टेयर हो गया है।
उत्पादन और उत्पादकता में तीन गुना वृद्धि
वर्ष 2000 में खरीफ फसलों का उत्पादन 3929 हजार मीट्रिक टन था, जो 2025 में बढ़कर 12,927 हजार मीट्रिक टन हो गया है।
रबी फसलों का उत्पादन भी 483 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 2775 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया है।
औसत उत्पादकता खरीफ में 867 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 2657 किग्रा/हेक्टेयर, और रबी में 625 से बढ़कर 1490 किग्रा/हेक्टेयर हो गई है।
40 लाख से अधिक किसान परिवारों की भागीदारी
राज्य में वर्तमान में 40.11 लाख किसान परिवार कृषि से जुड़े हैं। इनमें 24.34 लाख सीमांत, 8.80 लाख लघु और 6.97 लाख दीर्घ किसान परिवार शामिल हैं। राज्य सरकार की नीतियों और सहकारी व्यवस्था ने किसानों की आमदनी और सामाजिक स्थिति में बड़ा परिवर्तन लाया है।
कृषि प्रयोगशालाओं और शिक्षा संस्थानों का नेटवर्क मजबूत
वर्ष 2000 में राज्य में केवल 1 उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला और 1 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला थी।
अब यह बढ़कर क्रमशः 8 उर्वरक प्रयोगशालाएं और 36 मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं हो गई हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य में अब 1 कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत 39 महाविद्यालय (28 घटक एवं 11 संबद्ध) संचालित हैं।


