सीजी भास्कर 24 फ़रवरी विधानसभा के प्रश्नकाल में सड़क हादसों को लेकर माहौल गंभीर रहा। सदन में यह सवाल उठाया गया कि रोज़मर्रा की आवाजाही अब लोगों के लिए जोखिम क्यों बनती जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि (Chhattisgarh Road Accidents Crisis) महज़ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि हर घर की पीड़ा है—जिसका समाधान अब टालना मुश्किल होता जा रहा है।
विधायक का हस्तक्षेप: बढ़ती मौतों पर सरकार से ठोस रोडमैप की मांग
बीजेपी विधायक ने सीधे तौर पर सरकार से पूछा कि बीते एक साल में कितनी जानें गईं, और हादसों की रोकथाम के लिए कौन-सा व्यावहारिक रोडमैप लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि चेतावनी बोर्ड, स्पीड कंट्रोल और ब्लैक-स्पॉट ट्रीटमेंट जैसे कदम ज़मीन पर दिखने चाहिए। यह बहस (Chhattisgarh Road Accidents Crisis) को लेकर नीति-निर्माण की कमी की ओर इशारा करती है।
सरकारी पक्ष: 6,898 मौतें, सुधारात्मक कदमों का दावा
परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि पिछले एक वर्ष में सड़क दुर्घटनाओं में 6,898 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक मैनेजमेंट, प्रवर्तन और जागरूकता अभियानों के जरिए स्थिति सुधारने के प्रयास जारी हैं। सरकार का दावा है कि (Chhattisgarh Road Accidents Crisis) से निपटने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
राजधानी पर सवाल: रायपुर में ट्रैफिक सिस्टम और सिटी बस सेवा की हकीकत
राजधानी रायपुर में सुगम यातायात और सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। विधायकों ने सिटी बसों की संख्या और संचालन पर स्पष्ट जानकारी मांगी। मंत्री ने विवरण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। शहरी ट्रैफिक की चुनौतियाँ (Chhattisgarh Road Accidents Crisis) को और जटिल बना रही हैं।






