Chhattisgarh RTE Seats Controversy: बिलासपुर में सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत आरक्षित सीटों में कमी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए हलफनामे (Court Hearing Update) में कई विरोधाभास पाए और स्कूल शिक्षा विभाग को सभी बिंदुओं पर स्पष्ट और विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए।
85 हजार से 30 हजार सीटें कम होने पर सवाल
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि जब पहले आरटीई के तहत करीब 85 हजार सीटें उपलब्ध थीं, तो अब उनमें लगभग 30 हजार की कमी कैसे आ गई। इस पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि इस बार सुनवाई में बताया गया कि सचिव चुनाव आयोग की ड्यूटी के चलते असम में हैं, इसलिए उनकी जगह संयुक्त सचिव ने 21 मार्च को हलफनामा प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड में लिया, लेकिन उसमें दी गई जानकारी पर असंतोष जताया।
54,875 छात्रों को मिलेगा लाभ, सरकार का तर्क
राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि सत्र 2026-27 में प्री-प्राइमरी स्तर पर आरटीई के तहत प्रवेश नहीं दिया जाएगा, क्योंकि यह कानून 6 से 14 वर्ष के बच्चों पर ही लागू होता है।
सरकार के अनुसार, पिछले सत्र के 35,335 छात्र कक्षा 1 में जाएंगे, जबकि 19,540 नए छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। इस तरह कुल 54,875 छात्रों को आरटीई (RTE Admission Policy) का लाभ मिलेगा। इसी आधार पर सरकार ने सीटों में कमी के आरोपों को गलत बताया है।
शिकायतों के आंकड़ों में भी विरोधाभास
हलफनामे में दुर्ग जिले की 118 शिकायतों में से 77 के निराकरण का दावा किया गया, लेकिन कोर्ट के सामने पेश दस्तावेजों में केवल 7 शिकायतों के निपटारे की बात सामने आई।
इस विरोधाभास पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और राज्य के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए।
निजी स्कूलों की मनमानी भी आई सामने
सुनवाई के दौरान निजी स्कूलों की अनियमितताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। नारायणा टेक्नो स्कूल और ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल पर सीबीएसई संबद्धता को लेकर गलत जानकारी देने, पूरे साल होम एग्जाम लेने के बाद अचानक बोर्ड परीक्षा के लिए मजबूर करने और फीस में मनमानी बढ़ोतरी के आरोप लगाए गए।
यह भी कहा गया कि शिकायत करने वाले अभिभावकों को धमकाने की कोशिश की जाती है, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया।
अगली सुनवाई 8 अप्रैल को
हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी मुद्दों पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले पेश करें। जिन मामलों में अब तक जवाब नहीं दिया गया है, उन्हें भी जल्द प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जहां कोर्ट सरकार से स्पष्ट जवाब की उम्मीद कर रहा है।


