सीजी भास्कर 23 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस वर्ष कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी देशवासियों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली है। स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम् की थीम पर आधारित यह प्रस्तुति जनजातीय समाज के उन वीर नायकों की कहानी कहेगी, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में अक्सर कम चर्चित रहा। (Chhattisgarh Tableau Republic Day) के जरिए राज्य अपनी सांस्कृतिक विरासत और संघर्ष की परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से रखेगा।
जनजातीय वीरों के बलिदान को समर्पित झांकी
झांकी के माध्यम से उन अमर जनजातीय योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का डटकर विरोध किया और स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। (Tribal Heroes of India) की यह प्रस्तुति केवल दृश्य नहीं, बल्कि साहस, आत्मसम्मान और सामूहिक संघर्ष की कहानी है, जो पीढ़ियों को प्रेरणा देती है।
डिजिटल तकनीक में सहेजा गया इतिहास
झांकी का प्रमुख आकर्षण देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की भव्य झलक होगी। नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। (Tribal Digital Museum India) जनजातीय इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक अनूठी पहल के रूप में उभर रहा है।
विद्रोह और बलिदान की प्रतीकात्मक प्रस्तुति
झांकी की शुरुआत 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर से होगी। धुर्वा समाज के इस महानायक ने आम की टहनियों और सूखी मिर्च के प्रतीकों के जरिए जनजातीय समाज को संगठित किया था। वहीं, झांकी के अंतिम हिस्से में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए नजर आएंगे, जो अकाल के समय गरीबों के अधिकारों के लिए लड़े और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहे। (Veer Gundadhur) और (Veer Narayan Singh) की यह प्रस्तुति जनजातीय गौरव का जीवंत प्रतीक बनेगी।


