सीजी भास्कर, 17 दिसंबर। स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की लापरवाही या कथित साजिश ने विधानसभा में सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा भर्ती 2025 से जुड़ी जानकारी को लेकर सदन में गलत और भ्रामक विवरण प्रस्तुत (Chhattisgarh Teacher Recruitment Scam) किया गया,
जिसके आधार पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी विधायक को लिखित जवाब दे दिया। बाद में विभाग ने इसे टंकण त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जानबूझकर गड़बड़ी किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने विधानसभा में सवाल उठाते हुए पूछा था कि बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा भर्ती के तहत कितने पद निकाले गए, विषयवार पदों का ब्योरा क्या है, और क्या विज्ञान विषय के पदों पर कॉमर्स या आर्ट्स पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई है। साथ ही उन्होंने शिकायतों और जांच की स्थिति की भी जानकारी मांगी थी।
मंत्री द्वारा सदन में दिए गए लिखित उत्तर में बताया गया कि वर्ष 2025 में बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक संविदा के 55 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन उसमें विषयवार विवरण का उल्लेख (Chhattisgarh Teacher Recruitment Scam) नहीं था। जवाब में यह भी कहा गया कि भर्ती नियमों में विषय बाध्यता स्पष्ट नहीं है और विज्ञापन में विज्ञान संकाय का उल्लेख टंकण त्रुटि के कारण हुआ, जिसे शुद्धि पत्र से हटाया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
“टंकण त्रुटि” की आड़ में बड़ी अनियमितता?
इसी कथित टंकण त्रुटि के सहारे भर्ती प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। तय मापदंड और स्पष्ट शर्तों के बावजूद विज्ञान विषय के सहायक शिक्षक पदों पर कॉमर्स और आर्ट्स संकाय से पढ़े अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया। इससे भी गंभीर बात यह रही कि मेरिट सूची में ऊपर रहने वाले गोल्ड मेडलिस्ट अभ्यर्थियों को चयन से बाहर कर दिया गया।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब शिकायतकर्ता कामिनी कौशिक ने कलेक्टर बिलासपुर संजय अग्रवाल को भर्ती में अनियमितताओं की शिकायत सौंपी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी विजय तांडे द्वारा दो प्राचार्यों की जांच समिति गठित की गई।
जांच में सही पाई गई शिकायतें
जांच समिति की रिपोर्ट में शिकायतों को सही ठहराते हुए भर्ती प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियों की पुष्टि की गई। रिपोर्ट के अनुसार, सहायक शिक्षक पद के लिए अनिवार्य योग्यता हायर सेकेंडरी विज्ञान संकाय से उत्तीर्ण (Chhattisgarh Teacher Recruitment Scam) होना और डीएड/डीएलएड पास होना थी। इसके बावजूद श्रद्धा परगनिहा और मेंहदी देवांगन जैसे अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया गया, जबकि दोनों ने हायर सेकेंडरी परीक्षा कॉमर्स संकाय से उत्तीर्ण की थी।
जांच में यह भी सामने आया कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान इन्हें पात्र घोषित कर अंतिम चयन सूची में स्थान दे दिया गया, जिसे समिति ने नियमों के खिलाफ बताया है।
अब कार्रवाई कब?
बताया गया है कि जुलाई 2025 में जारी विज्ञापन में कुल 191 पदों पर भर्ती होनी थी, जिनमें 55 पद सहायक शिक्षक के थे। पहले 400 अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी की गई और 275 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। अंतिम चयन सूची जारी करते समय नियमों और शर्तों की खुलकर अनदेखी की गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच रिपोर्ट में नियुक्तियों को स्पष्ट रूप से गलत ठहराया गया है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर जिले की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर पड़ना तय माना जा रहा है।


