सीजी भास्कर, 02 जनवरी | Chhattisgarh Weather Update : छत्तीसगढ़ में जारी कड़ाके की ठंड के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। उत्तर पाकिस्तान और पंजाब के ऊपर सक्रिय हुए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर प्रदेश के कुछ हिस्सों में देखने को मिल सकता है ।
दो दिनों तक हल्की बारिश की संभावना
मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार, अगले 48 घंटों तक प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। यह बारिश व्यापक नहीं होगी, लेकिन सुबह-शाम के समय ठंड के एहसास को और बढ़ा सकती है।
कोहरे की चादर ओढ़ सकते हैं कई इलाके
बारिश के साथ-साथ कुछ जिलों में घना कोहरा छाने की भी संभावना जताई गई है। खासतौर पर मैदानी और खुले क्षेत्रों में सुबह के वक्त दृश्यता प्रभावित हो सकती है, जिससे वाहन चालकों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।
पहले बढ़ेगा तापमान, फिर गिरेगा पारा
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, आगामी 48 घंटों में न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की हल्की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद अगले तीन दिनों में तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिरने की संभावना है, जिससे ठंड फिर तेज हो जाएगी।
दुर्ग संभाग में दिखा शीतलहर का असर
बीते 24 घंटों के दौरान दुर्ग संभाग के कुछ इलाकों में शीतलहर का प्रभाव दर्ज किया गया। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 5.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि दुर्ग में अधिकतम तापमान 29.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
बच्चों की सेहत पर बढ़ा खतरा
ठंड का असर बच्चों पर अधिक देखा जा रहा है। पिछले एक महीने में राजधानी समेत कई अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का शरीर तेजी से ठंड पकड़ता है।
नवजातों के लिए ज्यादा जोखिम
डॉक्टरों के अनुसार, नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। खासकर सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा ज्यादा रहता है।
NICU और SNCU तक पहुंच रहे केस
लापरवाही बरतने पर कई बच्चों को NICU और SNCU में भर्ती करना पड़ रहा है। शरीर का तापमान अचानक गिरना, सुस्ती और कंपकंपी हाइपोथर्मिया के प्रमुख लक्षण बताए जा रहे हैं।
OPD में बढ़ी मरीजों की संख्या
ठंड के कारण वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस संबंधी दिक्कतों के मरीज तेजी से बढ़े हैं। प्रमुख अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना हजारों लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बच्चों की संख्या भी अधिक है।


