सीजी भास्कर 25 दिसंबर।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की दिशा में ऐतिहासिक (Chhattisgarh Women Empowerment) निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने आगामी वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार निरंतर दूरदर्शी फैसले ले रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने के लिए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ तैयार किया गया है, जिसमें महिलाओं की सशक्त भागीदारी को केंद्रीय स्थान दिया गया है। इसी दृष्टिकोण के तहत राज्य में सेवा का आगामी वर्ष मातृशक्ति को समर्पित ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा।
मातृशक्ति को समर्पित संकल्प वर्ष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ‘महतारी गौरव वर्ष’ महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन और सामाजिक गरिमा को मजबूत करने का सशक्त (Chhattisgarh Women Empowerment) संकल्प होगा। यह वर्ष छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नेतृत्व, सहभागिता और सम्मान का एक नया अध्याय लिखेगा, जो समरस और विकसित राज्य की मजबूत नींव बनेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे बड़ा आशीर्वाद माताओं और बहनों से मिलता है। उनके विश्वास और आशीष से ही जनसेवा के कार्यों को नई ऊर्जा मिलती है। इसी भावनात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी के तहत यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है।
विश्वास वर्ष से महतारी गौरव वर्ष तक का सफर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल का पहला वर्ष ‘विश्वास वर्ष’ के रूप में समर्पित रहा, जिसमें शासन और जनता के बीच भरोसे की पुनर्स्थापना हुई। दूसरा वर्ष भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाया गया, जिसमें आधारभूत ढांचे, सामाजिक विकास और जनकल्याण के कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे हुए। अब सेवा का आगामी वर्ष पूरी तरह मातृशक्ति को समर्पित रहेगा।
महिला सशक्तिकरण की ठोस उपलब्धियां
बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर कई प्रभावी योजनाएं लागू की हैं। महतारी वंदन योजना के तहत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता (Chhattisgarh Women Empowerment) दी जा रही है। अब तक 22 किश्तों में 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये सीधे बैंक खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।
महिला कल्याण के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान, संपत्ति रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट, 368 महतारी सदनों का निर्माण, मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय का ऑनलाइन भुगतान जैसे फैसलों ने सुशासन और पारदर्शिता को और मजबूत किया है।
आजीविका, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर फोकस
स्व-सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए 42,878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। बस्तर सहित छह जिलों में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला समूहों को सौंपा गया है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, नवाबिहान योजना, डिजिटल सखी, दीदी ई-रिक्शा योजना, सिलाई मशीन सहायता और मिनीमाता महतारी जतन योजना जैसी पहलें महिला आजीविका के नए अवसर सृजित कर रही हैं।
महिला सुरक्षा के लिए वन-स्टॉप सेंटर, 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन से त्वरित सहायता सुनिश्चित की गई है। सुखद सहारा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जा रही है।
नई पहचान, नई दिशा
किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए शुचिता योजना, साइकिल वितरण योजना तथा नवा रायपुर में यूनिटी मॉल का निर्माण महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में अहम कदम है। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी इसी सोच का परिणाम हैं।
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्ष 2025-26 में विभाग को 8,245 करोड़ रुपये का बजट आवंटन यह स्पष्ट करता है कि महिला कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई उम्मीद, नई दिशा और सकारात्मक परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।


