Child Hyperactivity Issue : ग्वालियर में पिछले कुछ महीनों में बच्चों के घर छोड़कर निकल जाने की घटनाएं जिस तेजी से बढ़ी हैं, उसने परिवारों और पुलिस—दोनों को परेशान किया है। काउंसलिंग के दौरान सामने आए अधिकांश मामलों में बच्चों में अत्यधिक बेचैनी, गुस्सा और हाइपर एक्टिव व्यवहार (Child Hyperactivity Issue) देखने को मिला, जो मामूली रोक-टोक पर भी भड़क उठते हैं और बिना सोचे-समझे घर से निकल जाते हैं।
चोटिल भावनाएं, छोटी बातें और बड़ा कदम
पुलिस द्वारा ऑपरेशन मुस्कान के दौरान खोजे गए बच्चों ने जो वजहें बताईं, उन्होंने अधिकारियों को भी चौंकाया। एक ओर बच्चों को मोबाइल फोन देने से मना किया गया, वहीं कुछ मामलों में सिर्फ पढ़ाई के लिए टोक दिए जाने पर घर छोड़ने की नौबत आ गई। विशेषज्ञ इसे एक उभरते हुए व्यवहारिक विकार (Behaviour Disorder in Kids) की निशानी मानते हैं, जो समय रहते न संभालने पर गंभीर रूप ले सकता है।
परिवारों में संवाद की कमी से बढ़ रहा तनाव
कई मामलों में यह भी देखा गया कि बच्चे घर के माहौल से ज्यादा इंटरनेट की दुनिया में सुकून खोज रहे हैं। लगातार स्क्रीन टाइम, परिवार के साथ कम समय बिताना और हर मांग का तुरंत पूरा हो जाना—इन सबने बच्चों के धैर्य और भावनात्मक संतुलन पर असर डाला है। काउंसलिंग में सामने आया कि बच्चे अपने निर्णय खुद लेने में तो कमजोर पड़ रहे हैं, लेकिन गुस्से के क्षणों में वे डिजिटल निर्भरता (Digital Dependency Kids) के कारण घर को अप्रासंगिक समझने लगते हैं।
कई चौंकाने वाले केस सामने आए
एक 10 वर्षीय छात्र सिर्फ इसलिए गायब हो गया क्योंकि पिता ने होमवर्क पूरा न करने पर डांट दिया था। परिवार इस डर में था कि कहीं कोई अनहोनी न हो गई हो। इसी तरह एक किशोर, जिसे माता-पिता ने देर रात मोबाइल चलाने से रोका, एक छोटा सा नोट छोड़कर घर से चला गया। दोनों मामलों में गंभीरता से खोजबीन की गई और अंत में काउंसलिंग के बाद बच्चों ने माना कि उनका निर्णय उतावलेपन में लिया गया था।
विशेषज्ञों का सुझाव: प्यार, अनुशासन और समय—तीनों का संतुलन जरूरी
बाल मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि यह समय स्मार्ट पैरेंटिंग अपनाने का है। बच्चों के साथ रोज थोड़ी बातचीत, उनके साथ बैठकर भोजन करना और माता-पिता द्वारा मोबाइल का कम इस्तेमाल—ये छोटे कदम बड़ा बदलाव ला सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि घर में लगातार तनाव या बहस होने से बच्चे भावनात्मक रूप से असुरक्षित महसूस करते हैं, जिससे आधुनिक पालन-पोषण तनाव (Modern Parenting Stress) के चलते उनका व्यवहार अनियंत्रित होने लगता है।
पुलिस ने दी सलाह—बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर दें ध्यान
अधिकारियों का कहना है कि कई बच्चे सिर्फ गुस्से में, बिना किसी ठोस वजह के घर छोड़कर चल देते हैं। यह पैटर्न बताता है कि केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और घरेलू संवाद भी उतने ही अहम हैं। माता-पिता को सलाह दी गई है कि बच्चों की प्रतिक्रियाओं को हल्के में न लें और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ की मदद लेने में देरी न करें। पुलिस का मानना है कि समय रहते जागरूकता बढ़ाने से ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।





